अगर आप भी घूमने-फिरने के शौक़ीन हैं, तो आज हम आपको पंजाब के एक ऐसे शहर के बारे में बताने जा रहे हैं जो भारतीय इतिहास को अपने में समेटे हुए है. इस शहर का नाम है अमृतसर. अमृतसर का नाम सुनते ही सबके दिमाग़ में सबसे पहले बाबा हरमिंदर साहिब गुरुद्वारा जिसे हम स्वर्ण मंदिर के नाम से भी जानते हैं की तस्वीर नज़र आएगी. अमृतसर सिखों के पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है. इस ऐतिहासिक शहर में सिर्फ़ स्वर्ण मंदिर ही नहीं, बल्कि और भी कई ऐसी चीज़ें हैं जो देखने लायक हैं.

इस पवित्र धार्मिक स्थल की 10 प्रमुख जगहें जहां आप घूमने जा सकते हैं.

1. स्वर्ण मंदिर 

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बाबा हरमिंदर साहिब गुरुद्वारा,अमृतसर के आकर्षण का मुख्य केंद्र है. यहां हर दिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. सिखों के इस पवित्र धार्मिक स्थल में हर धर्म के लोग दर्शन करने आते हैं. दर्शन करने आये लोगों के लिए यहां पर 24 घंटे लंगर भी लगता है.

2. हैरिटेज वॉक

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स्वर्ण मंदिर तो ख़ूबसूरत है ही लेकिन इसके बाहर का नज़ारा और भी ख़ूबसूरत है. स्वर्ण मंदिर के दर्शन से पहले करीब आधा किमी तक आपको गेरुवे रंग में सजी आज़ादी से पहले की कई ऐतिहासिक चीज़ें देखने को मिलेंगी. यहां पर वॉक करने का अलग ही मज़ा है, इसीलिए इसे हैरिटेज वॉक भी कहते हैं.

3. वाघा बॉर्डर 

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4. पंजाबी ड्रेस

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अगर आप पंजाब गए और यहां का ट्रेडिशनल पटियाला सूट नहीं पहना तो फिर क्या पहना? पटियाला सूट पहन कर गिद्दा डांस करने का मज़ा ही कुछ और है.

5. विरासत हवेली 

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7. रामबाग़ गार्डन 

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पंजाब के राजा ग्रीष्मकाल में यहां आया करते थे. इस गार्डन में आप महाराजा रणजीत सिंह के जीवन की कई महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रदर्शनी के रूप में देख सकते हैं.

8. ख़ैर-उल-दीन मस्ज़िद 

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शाह अताउल्लाह बुख़ारी ने पहली बार इसी मस्ज़िद से ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ आवाज़ उठायी थी.

9. जलियांवाला बाग 

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13, अप्रैल 1919 जलियांवाला बाग कांड भारत के इतिहास का सबसे दुःख़द दिन है. जब ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिकों ने जनरल डायर के आदेश पर 1597 लोगों का नरसंहार किया था. यहीं से भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत हुई थी. फ़ायरिंग से खुद को बचाने के लिए कई लोग कुंए में कूद गए थे. आप यहां आज भी दीवारों पर गोलियों के निशान देख सकते हैं. आज इस ऐतिहासिक स्थल को बेहद ख़ूबसूरत बना दिया गया है, जो कि स्वर्ण मंदिर के पास ही स्थित है.

10. गोविंदगढ़ किला

 एक समय में इसे भांगियन के किले के रूप में जाना जाता था, गोविंदगढ़ किला 1849 के बाद सेना के नियंत्रण में रहा और भांगि शासन के पतन के बाद, महाराजा रणजीत सिंह ने किले को फिर से बनाया. जिसके केंद्र में एक विशाल 'Toshakhana' है जहां महाराजा की सेना के लिए अनाज़ रखा जाता था. बताया जाता है कि यहां एक सुरंग भी है जो सीधे लाहौर में खुलती है, लेकिन इसे अब बंद कर दिया गया है.