कुछ लोग ज़िन्दगी को सबसे अच्छा टीचर और वक़्त को सबसे अच्छा डॉक्टर मानते हैं. ज़िन्दगी के फ़लसफ़ों, लफ़्ज़ों में पिरोकर पेश करते हैं शायर, कवि और लेखक.

ज़िन्दगी के फ़लसफ़ों को बेहतरीन ढंग से कहा है सत्यपाल आनंद ने. 24 अप्रैल, 1931 को पाकिस्तान के चकवाल ज़िले में पैदा हुए सत्यपाल अमेरिका में रहते हैं.

अंग्रेज़ी में पीएचडी कर चुके सत्यपाल, एक बेहतरीन आलोचक भी हैं. उन्होंने न सिर्फ़ उर्दू में बल्कि हिन्दी, अंग्रेज़ी और पंजाबी में भी बहुत कुछ लिखा है.

आज अर्ज़ करते हैं सत्यपाल आनंद की चुनिंदा नज़्में-

तल्ख़ी- कड़वाहट, अलील- बीमार

मरहला- दौर या पड़ाव

बाद-ए-ख़िज़ां- पतझड़ में बहने वाली हवा

तवील- लंबा

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