रोटी, कपड़ा और मकान हमारी मूलभूत आवश्यकताएं हैं, पर इसके साथ कई और भी चीज़ें हैं, जिनके बिना जीवन व्यापन काफ़ी मुश्किल होगा. उदाहरण के तौर पर बिजली, पानी, टूथब्रश और टॉयलेट पेपर को ही ले लीजिए. आधुनिकता के इस दौर में ये चीज़ें हमारी रोज़मर्रा की ज़रुरत बन चुकी हैं और अगर हमें एक दिन भी इन चीज़ों के बिना गुज़ारना पड़ जाए, तो जीना मुश्किल हो जाता है. ये चार चीज़ें तो बस उदाहरण हैं, इसके साथ ही तमाम और भी चीज़ें हैं, ख़ैर उन चीज़ों की बात हम बाद में करेंगे. फिलहाल कभी ये सोचा है, आज कल की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में हम जिन चीज़ों के आदी हो चुकें हैं, प्राचीन समय में उनके बिना गुज़ारा कैसे होता होगा.

ये सवाल इसीलिए, क्योंकि जब इतनी सारी आधुनिक चीज़ों का अविष्कार नहीं हुआ था, तब भी लोग ख़ुशहाली से जीवन व्यतीत करते ही थे, पर बड़ा सवाल ये है कि कैसे? आख़िर कैसे लोग फ़्रिज़, घड़ी और फ़ोन जैसी ज़रुरी चीज़ों के बिना काम चलाते होंगे, कितना दिलचस्प होता होगा, वो दौर. अगर आप भी अबतक इन बातों से अंजान हैं, तो आइए आपको दिखाते हैं कि प्राचीन समय के लोग कैसे सूझ-बूझ के साथ आज की आधुनिक चीज़ों के बिना ज़िंदगी गुज़र बसर करते थे.

1. दूध में डाला जाता था मेंढक

कुछ लोगों को ये सुनते ही उल्टी आ सकती है, पर ये कड़वा सच है. दरअसल, प्राचीनकाल में लोगों के पास फ़्रिज नहीं हुआ करता था, जिस कारण अकसर लोगों का दूध ख़राब हो जाता था और जिसके चलते लोगों ने दूध में मेंढक डालना शुरु कर दिया, क्योंकि मेंढक में Antibiotic Peptide नामक बैक्टेरिया पाया जाता है, जो दूध को ख़राब होने से रोकता है. हालांकि, रूसियों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं था. वहीं जिन लोगों ने ये खोज की थी, उन्हें भी ये नहीं पता था कि ऐसा करने से दूथ ख़राब नहीं होता.

2. टॉयलेट पेपर की जगह इस्तेमाल होता था भुट्टा

19वीं सदी में जब लोग अमेरिका शिफ़्ट हुए, तब टॉयलेट पेपर के अभाव के चलते शौच के समय, उन्होंने भुट्टे का इस्तेमाल करना शुरु कर दिया. इसके साथ ही कुछ किसान ऐसे भी थे, जो शरीर की गंदगी साफ़ करने के लिए, मैग्ज़ीन के पेज का इस्तेमाल करते थे. बता दें कि टॉयलेट पेपर का अविष्कार 1935 में हुआ था, उससे पहले तक लोग इसी तरह ज़िंदगी की व्यतीत कर रहे थे.

3. पेशाब से गीला कर लेते थे बिस्तर

अलार्म घड़ी आने से पहले लोग मुर्गे की आवाज़ से समझ जाते थे कि सुबह हो गई है. वहीं कुछ जगह पर लोगों को जगाने के लिए चर्च में लगी घंटी का इस्तेमाल किया जाता था, पर ये बातें हर जगह लागू नहीं होती. आपको जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका में लोग सुबह जागने के लिए, रात में इतना ज़्यादा पानी पीते थे कि सुबह तक उनका बिस्तर पेशाब से भर जाए और वो ख़ुद को बिल्कुल नष्ट महसूस करने लगे, तो ऐसे जल्दी उठते थे अमेरिकी लोग.

4. समय बताने के लिए सेट किए गए थे बूथ

घड़ी के अविष्कार से पहले प्राचीन समय में 'समय' जानने का तरीका बेहद अजीब हुआ करता था. 1933 में यूनिनाइटेड किंगडम में समय बताने के लिए Speaking Clock स्थापित की गई, जिस भी शख़्स को समय जानना होता था, वो उस नबंर फ़ोन करता और उसे समय का पता चल जाता. वहीं 1933 में ही कुछ टेलीकॉम कंपनियों ने फ़ैसला किया कि प्रतियोगिता के ज़रिए, क्यों न ऐसी लड़की ढूंढ़ी जाए, जो क्लॉक रूम में बैठ कर 24 घंटें लोगों को समय बता सके, फिर ये आईडिया सफ़ल हुआ और प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली जिस लड़की की आवाज़ सबसे बेहतरीन होती, उसे समय बताने के क्लॉक रूम में भेजा जाता था.

5. आर्टिफ़िशियल लाइट से पहले, लोग सेगमेंट में सोते थे

हमारे घरों में रौशनी की चमक पड़ने से पहले, लोग टुकड़ों में सोते थे. मान लीजिए अगर 12 से 14 लोग Freelance Listicle Writer हैं, तो वो लगभग 4 घंटे तक सोते और मध्य रात्रि में उठ कर कुछ घंटे जाग कर बिताते हैं. वहीं अगर कोई बड़े दर्जे का लेखक होता था या किसी पत्रिका के लिए लिखता था, तो वो वापस सोने के लिए जा सकता था. थ्योरी के अनुसार, चार घंटे बाद सो कर उठने पर हमारे शरीर से Prolactin नामक हार्मोन रिलीज़ होता था, जो कि सेक्स ड्राइव को बढ़ाता है. इस तरह से जगाने का ये भी ये कारण हो सकता है.

6. कंप्यूटर से पहले, हुआ करते थे मानव कंप्यूटर

चौंकिए मत बिल्कुल सही पढ़ा है आपने, कंप्यूटर के अविष्कार से पहले मानव कंप्यूटर हुआ करते थे. दरअसल, 17वीं शताब्दी के आस-पास गणित की गणना के लिए लोगों को किराए पर लिया जाता था. Astronomers और Mathematicians, Tedious की गणना के लिए एक टीम हायर करते थे, जो ऑफ़िस आकर सारा दिन गणित हल कर सके. ये लोग शिफ़्ट के अनुसार काम करते थे, जो कि बिल्कुल भी मज़ेदार नहीं होता होगा. इतना ही नहीं, कैलकुलेटर के अविष्कार से पहले इन Human Computers ने logarithm का पूरा चार्ट भर दिया था.

7. टूथब्रश की जगह यूज़ होते थे ईंट और चीनी-मिट्टी के बर्तन

एक दौर वो भी था, जब औद्योगिक क्रांति के कारण लोग ईंटों और चीनी-मिट्टी के बर्तनों को कुचलकर अपने दांत साफ़ किया करते थे. वहीं Elizabethans ने तो सारी चीज़ों को दरकिनार करते हुए, ये कहना शुरु कर दिया था कि आजकल काले दांतों का फ़ैशन है.

8. ट्रेन आने से पहले, लोग नहीं करते थे समय की परवाह

ट्रेन के अविष्कार से पहले लोग समय की परवाह नहीं करते थे और न ही लोगों को इससे कुछ ख़ास फ़र्क पड़ता था. किसी फ़िक्स समय पर दुकानें खुल जाया करती थीं, तो वहीं कुछ लोग इस बात से समय का अंदाज़ा लगा लेते थे कि वो अभी अपने पड़ोसी से कुछ मिनटों की कुछ दूरी पर हैं.

9. इत्र से पहले इस्तेमाल किया जाता था गुलदस्ता

मध्ययुगीन यूरोप में लोग ख़ुशबू के लिए एक-दूसरे को गुलदस्ता उपहार में देते थे, क्योंकि उस दौरान यूरोप के ज़्यादातर लोग महीने में एक बार स्नान किया करते थे. इन लोगों के पास से इतनी बदबू आती थी कि इनके आस-पास मौजूद लोगों को बर्दाशत ही नहीं होती, इस बदबू से निजात पाने के लिए ही लोगों ने फूलों का आदान-प्रदान शुरु किया.

10. Nail Clippers से पहले ऐसे हुआ करते थे नाखून

1875 तक Nail Clippers का अविष्कार नहीं किया गया था, इस दौरान रोमन लोग अपने नाखूनों को चाकू से काटा करते थे. वहीं एक ओर चीन में गरीब लोग इतनी मेहनत करते थे कि उनके नाखून जल्दी लंबे न हो पाएं, तो दूसरी ओर 1 फ़ीट लंबे नाखून अमीरों लोगों की निशानी होते थे. फ़िलहाल आज के वक़्त में ये दृश्य किसी हॉरर फ़िल्म से कम नहीं है. 

Source : listverse