वो बंटवारे के बाद पाकिसतान में जाकर बस गये, लेकिन ताउम्र ख़ुद को पंजाबी ही कहते थे. ऐसे शायर थे मुनीर अहमद, जिन्हें हम मुनीर नियाज़ी के नाम से जानते हैं.

मुनीर साहब की रूह में पंजाब बसा था, इसलिये उनके क़लम से निकले हर्फ़ों में भी पंजाब की ख़ुशबू आती थी. 9 अप्रैल, 1928 को होशियारपुर में जन्मे नियाज़ी, बंटवारे के बाद साहिवाल चले गए. पढ़ाई पाकिस्तान में ही हुई और साथ-साथ शायरी का दौर भी चलता रहा.

उनकी कई नज़्मों को पाकिस्तानी फ़िल्मों में गीतों के रूप में इस्तेमाल किया गया. वे गीतकार के तौर पर भी जाने जाते थे.

मेंहदी हसन, नूर जहां जैसे फ़नकारों ने उनकी ग़ज़लों को अपनी आवाज़ से सजाया है.

पेश है मुनीर नियाज़ी की कुछ चुनींदा नज़्में-

अगर आपको ये नज़्मों की माला पसंद आई, तो हमें ज़रूर बतायें. हम ऐसी ही महफ़िल सजाते रहेंगे.