वक़्त! क्या है ये वक़्त? वक़्त जो कभी रुकता नहीं, किसी के लिए ठहरता नहीं... कोई वक़्त को रोक नहीं सकता, बदल नहीं सकता क्योंकि वक़्त अपनी गति से निरंतर चलता रहता है. शायद तभी वक़्त को सबसे बलवान कहा जाता है. वक़्त से शक्तिशाली कोई नहीं. मिनट, घंटे, दिन, हफ़्ते, महीने और साल बीतते जाते हैं, और यही वक़्त गुज़रते-गुज़रते हमको ज़िन्दगी भर की अच्छी-बुरी यादें दे जाता. ऐसी यादें जो कभी वापस नहीं आतीं. हां, लेकिन ये भी सच है कि वक़्त अच्छा हो या बुरा हमेशा एक सीख पर ही ख़त्म होता है. बुरा वक़्त हमें ग़लतियों से रू-ब-रू करता है, तो अच्छा वक़्त और अच्छा करने के लिए प्रेरित करता है.

तो आइये इस वक़्त की गहराई को समझने और उससे कुछ सीखने की कोशिश करते हैं. इसके लिए आज हम आपके लिए लाये हैं अलग-अलग शायरों द्वारा वक़्त पर उर्दू में लिखी गयीं चंद ख़ूबसूरत शायरियां.

किसी ने क्या ख़ूब कहा है, वक़्त-वक़्त की बात है जनाब! ये वक़्त ही है जिसका बहाव इंसान को पल-पल ज़िन्दगी के नए-नए चेहरों से मिलवाता है. इसलिए वक़्त की अहमियत को समझो और किसने क्या किया, क्या बोला, क्यों बोला... जैसी छोटी-छोटी बातों को छोड़कर वक़्त के साथ क़दम मिलाने की सोच रखो, देखना फिर वक़्त भी तुमको सलाम करेगा.