शहद-सी कानों में घुल जाने वाली उर्दू भाषा की पहली महिला लेखिका के रूप में हम इस्मत आपा को जानते हैं. क्या आप जानते हैं कि उर्दू में कवितायें लिखने वाली पहली महिला कवयित्री कौन थीं? वो थीं अदा जाफ़री.

उत्तर प्रदेश के बदायूं में 22 अगस्त, 1924 को अदा का जन्म हुआ. उस वक़्त नाम रखा गया, अज़ीज़ जहां. जब वो सिर्फ़ 3 साल की थी, तभी पिता का मृत्यु हो गई. मां ने पाल-पोस कर बड़ा किया. 12 साल की उम्र में ही कवितायें लिखने लगी थीं अदा, अदा बदायूंनी के पेन नेम से.

29 जनवरी, 1947 को नुरूल हसन जाफ़री से निकाह हुआ और शादी के बाद अपना पेन नेम, अदा जाफ़री रख लिया. बंटवारे के बाद अदा कराची चली गईं. उनके शौहर, ख़ुद भी उर्दू और अंग्रेज़ी अख़बारों के लिए लिखते थे. अपने शौहर को वो प्रेरणा के रूप में देखती थीं.

अदा का जन्म एक रूढ़िवादी समाज में हुआ, जहां औरतों को पर्दा करने पर मजबूर किया जाता और तालीम हासिल करने से रोका जाता. विचारों की स्वच्छंदता नाम की कोई चीज़ नहीं थी. फिर भी उन्होंने अपने ख़्यालों को शब्द दिए और सुंदर कवितायें, गज़ल, आज़ाद नज़्में लिखीं. नारीवाद की समर्थक अदा ने 12 मार्च 2015 को दुनिया को अलविदा कहा, पर उनकी बेहद ख़ूबसूरत लेखनी आज भी हमारे बीच है.

पेश है उर्दू की पहली कवयित्री की क़लम से निकले कुछ शेर:

1.

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ताइर: पंछी, तक़्सीर: गुनाह

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सफ़ीनों: क़श्ती

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10.

सबा: सुबह की हवा, साअ'तों: वक़्त

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12.

बे-मेहर: बे-मोहब्बत

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