बॉलीवुड में ऐसे कई कलाकार हुए, जिन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. उन्होंने अपनी लाजवाब अदाकारी से दर्शकों को कभी हंसाया तो कभी रुलाया. लेकिन कुछ ऐसे भी कलाकार हुए, जो एक बार जिस रोल में पसंद कर लिए गए, उसी तरह के रोल निभाने लगे. निर्माता और निर्देशक भी उन कलाकारों को अपनी फ़िल्मों में उसी तरह के रोल ऑफ़र करते थे.

आज हम आपको बॉलीवुड के कुछ ऐसे ही कलाकारों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने अपने पूरे करियर में ज़्यादातर एक ही तरह की भूमिकाएं निभाई और दर्शक उन्हें उसी तरह के रोल के लिए जानने लगें.

1. अमोल पालेकर

अमोल पालेकर के चेहरे से ही मासूमियत झलकती थी. अपनी ज़्यादातर फ़िल्मों में उन्होंने मासूम किरदार ही निभाए. इस तरह की भूमिकाएं निभाकर अमोल पालेकर इतना मशहूर हो गए कि जब भी कोई लड़का ज़्यादा शर्माता है तो लोग उसकी तुलना अमोल पालेकर से करने लगते हैं.

2. निरुपा रॉय

70-80 के दशक में कोई ऐसा बड़ा एक्टर नहीं बचा होगा, जिसकी मां का रोल निरुपा रॉय ने न निभाया हो. निरुपा रॉय एक बेहतरीन अभिनेत्री थीं, लेकिन एक बार मां का रोल निभाने के बाद वो मां के रोल में ही टाइपकास्ट हो गईं.

3. मोहनीश बहल

मोहनीश बहल एक अच्छे एक्टर हैं. बीते ज़माने की बेहतरीन अदाकारा नूतन के बेटे हैं. लेकिन इन सब पर उनकी 'बड़े भैया' की इमेज भारी पड़ती है. 'हम साथ-साथ हैं' और 'हम आपके हैं कौन' जैसी फ़िल्मों में बड़े भाई का किरदार इतनी ख़ूबसूरती से निभाया कि लोग उन्हें बड़े भैया के रूप में ही पहचानने लगे.

4. युनुस परवेज़

युनुस परवेज़ को फ़िल्मों में हमेशा छोटी-मोटी भूमिकाएं ही निभाने को मिली. ज़्यादातर फ़िल्मों में उन्हें मुनीम या फिर किसी गांव/कस्बे के आदमी का ही किरदार निभाने को मिलता था. इस तरह के रोल में टाइपकास्ट होने के बाद युनुस साहब को कभी कोई बड़ा किरदार निभाने का मौका नहीं मिला.

5. एम.बी. शेट्टी

एम.बी. शेट्टी मुख्यतः एक स्टंटमैन थे और फ़िल्मों में ऐसे गुंडे का किरदार निभाते थे, जिसका काम सिर्फ़ हीरो से पिटना होता था. इन्हें ज़्यादातर आपने धर्मेंद्र की फ़िल्मों में देखा होगा. एम.बी. शेट्टी, मशहूर फ़िल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के पिता थे.

6. गेबिन पैकर्ड

इन्हें आप नाम से भले ही न पहचाने, लेकिन चेहरे से ज़रूर पहचानते होंगे. गेबिन फ़िल्मों में एक कलाकार के रूप में कभी स्थापित नहीं हो सके, लेकिन कसरती शरीर का मालिक होने की वजह से इन्हें अकसर फ़िल्मों में गुंडे का रोल मिल जाता था. इन्होंने हर फ़िल्म में एक ही जैसा रोल मिलता था. जिसमें खलनायक इन्हें हीरो से फ़ाइट करने के लिए भेजता था.

7. आलोक नाथ

आलोक नाथ, जिनका नाम सुनते ही संस्कारी बापू का नाम सामने आता है. 'मैंने प्यार किया' में हीरोइन के पिता का रोल करने के बाद आलोक नाथ उसी तरह की इमेज में बंध गए. बाद में उन्होंने 'बोल राधा बोल' और 'षड़यंत्र' जैसी फ़िल्मों में नकरात्मक रोल करके अपनी संस्कारी इमेज को छोड़ने की कोशिश की, लेकिन सफ़लता नहीं मिली.

8. डैनी

डैनी अपनी खलनायकी के लिए काफ़ी मशहूर हैं. 'घातक' फ़िल्म में कातिया का खूंखार रोल इन्होंने जिस तरीक़े से निभाया उसकी लोग आज भी मिसाल देते हैं. इनकी खलनायकी के खौफ़ का आलम ये था कि अगर ये किसी फ़िल्म में पॉज़िटिव रोल भी निभाते थे, तो दर्शकों को लगता कि आखिर में ये गद्दारी ज़रूर करेगा.

9. मैक मोहन

सांभा को कौन भूल सकता है. लेकिन सांभा के किरदार की लोकप्रियता की कीमत भी मैक मोहन को चुकानी पड़ी. वो उसी तरह की भूमिकाओं में टाइपकास्ट हो गए. मैक मोहन को इसके बाद विलेन के चमचे के अलावा कोई सशक्त किरदार निभाने का मौका नहीं मिला.

10. जगदीश राज

जगदीश राज के ज़िक्र के बिना टाइपकास्ट कलाकारों की लिस्ट अधूरी रहेगी. जगदीश के नाम पर 144 फ़िल्मों में पुलिस का किरदार निभाने का रिकॉर्ड है. एक दौर ऐसा था, जगदीश राज को फ़िल्म में देखते ही दर्शक समझ लेते थे कि ये पुलिस वाला ही है. भले ही जगदीश राज उस फ़िल्म में चोर बने हो.

11. इफ़्तिखार

इफ़्तिखार ने भी कई सारी फ़िल्मों में पुलिस की भूमिका निभाई. इनके ऊपर पुलिस का रोल काफ़ी सूट करता था. इफ़्तिखार साहब ने एक इन्टरव्यू में बताया था कि एक सज्जन मुझसे होटल में मिले और हाथ मिला कर पूछा 'और जनाब आजकल आपकी पोस्टिंग कहां पर हैं?'

12. टॉम ऑल्टर

टॉम ऑल्टर के टाइपकास्ट होने के पीछे उनके चेहरे का ख़ास योगदान था. इसलिए ज़्यादातर फ़िल्मों में उन्हें अंग्रेज़ अधिकारी का ही रोल निभाने को मिला.

13. शक्ति कपूर

शक्ति कपूर एक बेहतरीन एक्टर हैं, लेकिन उनकी पहचान एक ठरकी विलेन के रूप में है. शक्ति कपूर ने कई सारी फ़िल्मों में फ़नी किरदार भी निभाए हैं, लेकिन उन्हें हवस के पुजारी वाले रोल के लिए ही ज़्यादा जाना जाता है.

14. रीमा लागू

रीमा लागू को मां के साथ-साथ समधन का भी बेहतरीन किरदार निभाने के लिए पहचाना जाता है. रीमा लागू, राजश्री बैनर की फ़िल्मों की प्रमुख सदस्या थीं. उन्होंने इस बैनर की कई फ़िल्मों में मां/समधन का रोल किया.

15. राजपाल यादव

राजपाल अच्छे अभिनेता हैं. लेकिन दर्शक इन्हें कॉमेडियन के रूप में ही पहचानते हैं. राजपाल ने कुछ फ़िल्मों में गम्भीर और मुख्य भूमिका भी निभाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली.

ऐसा नहीं है कि इन कलाकारों के अन्दर प्रतिभा की कमी थी, लेकिन इन्हें उस तरह के ज़्यादा रोल निभाने को नहीं मिले, जिसमें ये ख़ुद को साबित कर सकें. एक बार सफ़ल होने के बाद इन कलाकारों को उसी तरह की भूमिकाएं ऑफ़र होने लगीं और ये उन्हीं में टाइपकास्ट हो गए. अगर आपको भी किसी ऐसे कलाकार के बारे में पता हो, तो कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं.