साल 2016 में बिहार टॉपर्स घोटाले के सामने आने के बाद से ही वहां की शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े होने लगे. वहीं दूसरी तरफ़ उम्मीद की कई किरणें भी नज़र आई हैं, जो ये बताती हैं कि अभी बिहार के लहू में कुछ कर गुज़रने का जज़्बा बाकी है. ऐसी ही एक ख़बर भोजपुर ज़िले से आई है. यहां खेलने-खाने की उम्र में एक लड़के ने आईआईटी के लिए क्वालिफ़ाई कर लिया है.

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इस छोटे उस्ताद का नाम शिवम है, जो एक किसान के बेटे हैं. इन्होंने हाल ही में हुई जेईई एडवांस 2018 की परीक्षा में 383वीं रैंक हासिल की. इसका श्रेय वो अपने बड़े भाई और टीचर को देते हैं.

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इनके बड़े भाई सत्यम ने भी 2012 में ये परीक्षा पास की थी, पर रैंक अच्छी नहीं आई. इसलिए वो जेईई एग्ज़ाम की तैयारी करने के लिए कोटा चले गए थे. छोटा भाई शिवम भी उनके साथ गया था. यहां से कोचिंग लेने के बाद 2013 में सत्यम ने जेईई एडवांस में 679वीं रैंक हासिल की थी. फ़िलहाल वो आईआईटी कानपुर में M. Tech कर रहे हैं.

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अपने बड़े भाई से प्रेरित होकर ही शिवम ने ठान लिया था कि वो भी अपने भाई की तरह आईआईटी से पढ़ाई करेंगे. शिवम ने 12वीं में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे. उन्होंने कहा कि, कोचिंग के बाद रोज़ाना 8-9 घंटे सेल्फ़ स्टडी और बड़े भाई की गाइडेंस की मदद से वो ये एग्ज़ाम क्रैक करने में कामयाब हुए.

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इनका इरादा आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में बी.टेक करने का है. बखोरापुर गांव में इनके पिता सिद्धनाथ खेती-किसानी करते हैं. इनके दोनों बेटे अब देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान पढ़ाई करेंगे. इस बात से वो बहुत ख़ुश हैं.

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