परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हो, अपने हौसले और वीरता के लिए भारतीय सेना हमेशा जानी जाती है. आज हम आपको देंगे भारतीय सेना के मार्कोस कमांडोज़ के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारियां. मार्कोस दुनिया के सबसे बेहतरीन कमांडोज़ में से एक हैं. मार्कोस कमांडोज़ की ट्रेनिंग दुनिया में सबसे कठिन ट्रेनिंग मानी जाती है.

कमांडोज़ की ये ट्रेनिंग Army Paratroopers और पश्चिमी देशों के सैनिकों से कहीं कठिन होती है. भारतीय मार्कोस कमांडोज़ की ट्रेनिंग यूएस नेवी सील के समान ही होती है. आइए एक नज़र डालते हैं मार्कोज़ कमांडोस की ट्रेनिंग के चरणों पर.

1. HALO और HAHO Jump

एक मार्कोस कमांडो बनने की पहली शर्त HALO और HAHO Jump है. आइए आपको बताते हैं क्या होती है HALO और HAHO Jump.

HALO Jump - धरती से 11 किलोमीटर की ऊंचाई से कूदना होता है. इसमें कमांडो को अपना पैराशूट धरती के नज़दीक पहुंचने पर ही खोलना होता है.

HAHO Jump - धरती से 8 किलोमीटर की ऊंचीई से कूदना होता है. इसमें कमांडो को अपना पैराशूट कूदने के बाद 10-15 सेकेंड बाद खोलना होता है. 8 किलोमीटर की ऊंचाई से ये कूद -40 डिग्री सेल्सियस तापमान में होती है.

2. मार्कोस कमांडोज़ के सुबह की शुरुआत रोज़ाना 20 किलोमीटर की दौड़ से होती है.

3. सुबह की दौड़ के बाद दिन में 60 किलो वज़न के साथ 20 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी होती है.

4. मार्कोस कमांडोज़ की सारी ट्रेनिंग एक्टिव हथियारों के साथ होती है, जिनमें गोला-बारूद होता है.

5. हफ़्ते में एक दिन मार्कोस कमांडोज़ को 60 किलो वज़न के साथ 120 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी होती है. इस ट्रैकिंग को एक समय के अंदर पूरा करना होता है. नहीं कर पाने पर आप बाहर हो जाते हैं.

6. हफ़्ते में एक दिन 20 घंटे लगातार ट्रेनिंग होती है. ये पूरे 20 घंटे ज़िम करने जैसा होता है.

7. ट्रेनिंग के दौरान मार्कोस कमांडोज़ को रोज़ के शारीरिक श्रम करने के बाद भी हफ़्ते में केवल 4 घंटे सोने को मिलते हैं.

8. साथ ही मार्कोस कमांडोज़ को रोज़ शाम को 25 किलो वज़न के साथ कीचड़ में दौड़ना होता है.

9. इसके बाद पार करनी होती 2.5 किलोमीटर की बाधा दौड़.

10. इन सब के बाद 25 मीटर दूर खड़े साथी के बगल में स्थित टारगेट में लगाना होता है निशाना. कमांडोज़ को निशाना चूकने और गोली न चलाने दोनों स्थिति में फ़ेल कर दिया जाता है.

11. मार्कोस कमांडोज़ के लिए आने वाले 90 प्रतिशत जवान कठिन ट्रेनिंग के कारण इस ट्रेनिंग को पूरा नहीं कर पाते हैं.

12. मार्कोस कमांडोज़ की ट्रेनिंग दो साल या उससे ज़्यादा हो सकती है.

13. मरीन कमांडोज़ कहीं भी लड़ सकें इसके लिए उन्हें विशेष रूप से तैयार किया जाता है. ऊंचे क्षेत्रों में इनकी ट्रेनिंग होती है ताकि ये ठंडे क्षेत्रों में लड़ पाएं. इसके साथ ही जंगल और पहाड़ों में भी इनकी विशेष ट्रेनिंग होती है.

14. मार्कोज़ कमांडोज़ ज़मीन पर लेट कर, सामने या पीछे दौड़ते हुए सटीक फ़ायरिंग कर सकते हैं. इसके साथ ही ये कमांडो आईने में देखते हुए गोली चला सकते हैं.

15. मार्कोज़ कमांडोज़ का रिएक्शन टाइम 0.27 सेकेंड होता है.

16. मार्कोज़ कमांडोज़ विदेशी भाषाओं जैसे अरबी या दूसरी भाषा में भी दक्ष होते हैं.

मार्कोस कमांडोज़ देश के सबसे दक्ष सैनिक होते हैं. जो हर विपरीत स्थिति से निपटने को हमेशा तैयार रहते हैं. मार्कोस कमांडोज़ की पहचान गुप्त रखी जाती है. इनके लिए यूनिफ़ार्म पहना कम्पलसरी नहीं होता है. मुंबई हमले के समय इन्हीं कमांडोज़ ने आतंकियों का ख़ात्मा किया था. अपनी पहचान गुप्त कर देश की रक्षा करने वाले ये सैनिक देश के पहरेदार हैं.

Source - Storypick