'कितनी गंदगी है यार! इस देश का कुछ नहीं हो सकता...'

'जहां देखो थूक देते हैं, यार. कैसे लोग हैं?'

'अरे ऐसे कैसे सिग्नल तोड़ कर चला गया वो कारवाला?'

ये कुछ ऐसे वाक्य हैं, जिन्हें हम अपने इर्द-गिर्द सुनते हैं. कभी-कभी हम ख़ुद भी ऐसा कह देते हैं. खीज में बहुत से लोग कह देते हैं, 'भारत का कुछ नहीं हो सकता'

हम भारतीय बड़े मासूम हैं. अपने सामने ग़लत होता देख चुप रहते हैं और ख़ुद भी ऐसे काम करते हैं, जिनके बारे में हम जानते हैं कि वो ग़ैरक़ानूनी हैं. हम जान-बूझकर ऐसे काम करते हैं, जो ग़ैरक़ानूनी हैं और जब कोई दूसरा ये काम करे, तो हम चुपचाप गर्दन घुमा लेते हैं.

अभी भी नहीं समझे, कि आख़िर हम कहना क्या चाहते हैं?

चलिये आपको दर्शन करवाते हैं, हम भारतीयों की ऐसी ही कुछ आदत से मजबूर हरकतों से, जो ग़लत होने के बाद भी हम किए जा रहे हैं-

1. घूस देकर पतली गली से निकलना

Source- I Pleaders

ईमानदारी से चालान न कटवाना और घूस देकर कुछ काम निकलवाना हमारा राष्ट्रीय Talent है.

2. यहां पेशाब करना मना है... तो क्या हुआ?

Source- You Tube

लगभग हर जगह सुलभ शौचालय हैं, फिर भी सड़क पर ही सूसू करना है. राह चलते आदमियों के मूत्र विसर्जन की प्रदर्शनी हर जगह लगी रहती है. मोदी जी स्वच्छ भारत कहते-कहते थक गए लेकिन हमारे महापुरुष दीवारों को गीला करते नहीं थके.

3. कहीं भी कचरा फेंक देना

Source- The Logical Indian

चलती बस से कचरे फेंकना की प्रतियोगिता हो, तो हम भारतीयों से आगे कोई नहीं निकल पाएगा. असल में सड़कें हम लोगों के लिए एक कैंवस है, उसे अपनी तरह से पेंट करते चले जा रहे हैं. कचरे का पिकासो भी कहा जा सकता है हमें!

4. ट्रैफ़िक नियमों का पालन न करना

Source- India TV News

हमारे यहां हरी बत्ती का मतलब गाड़ी भगाना और लाल बत्ती का मतलब और तेज़ गाड़ी भगाना है. चलते ट्रैफ़िक में सड़क पार करने का Talent सिर्फ़ हम में है.

5. बच्चों को स्कूटी/बाइक चलाने की छूट देना

Source- Deccan Chronicle

अपने बच्चों को ख़तरों के खिलाड़ी बनाने का रिस्क लेते हैं भारतीय माता-पिता. अपने यहां का लगभग हर बच्चा 18 साल से पहले ही 4-व्हीलर चला रहा होता है और उसका हवाई जहाज़ बना रहा होता है.

6. सड़क पर थूकना

Source- Twitter

कुछ लोग घर से निकलते ही इसलिये हैं ताकी सड़क पर थूक सकें. गाड़ी रोक कर सड़क पर थूकते हुए लोग अपने यहां मिलेंगे. कुछ प्राणी तो ऐसे थूकते हैं मानों घर से गले में बलगम भरकर सड़क पर फेंकने के लिए ही निकले हों.

7. ऐतिहासिक जगहों पर नाम लिखना, वहां गंदगी करना

Source- HT

स्विटी, पिंकी, प्रिया का नाम ऐतिहासिक जगहों पर लिख कर, तीर वाला दिल बनाने से ही आशिक़ी मुकम्मल नहीं हो जायेगी.

8. ट्रेन/मेट्रो/बस में बिना टिकट सफ़र करना

Source- HT

ट्रेन में बिना टिकट सफ़र करना कुछ लोगों के लिए शान की बात है. क्यों भाई, अगर टिकट ले लोगे तो कोई नुकसान हो जायेगा? कहीं-कहीं तो लोग TT पर ही धौंस दिखाने लगते हैं.

9. प्रतियोगिता/बोर्ड परिक्षा में नकल करना

Source- The Hindu

नकल के अलग-अलग तरीकों से आप भी भली-भांति परिचित होंगे. परिक्षा के Instructions में इसे ग़ैरक़ानूनी बताया गया है फिर भी करते हैं. बिहार बोर्ड वाले इसमें Phd कर चुके हैं.

10. रास्ते पर गाड़ी पार्क करना

Source- India Online

बड़े शहरों में पार्किंग की समस्या है और जहां नहीं हैं वहां सड़क पर वाहन खड़े कर, लोग इसे समस्या बना देते हैं. क्या ये ज़रूरी है कि सब्ज़ी मंडी में गाड़ी लेकर पहुंचा जाये? पैदल चलना इतना भी नुकसानदायक नहीं होता है.

11. दुपहिया वाहनों पर तीन सवारियां बैठाना

Source- I run the internet

अरे भाई साहब! 4-5 भी Adjust हो जाते हैं. वैसे करने वाले अपने मन की करेंगे, लेकिन भले के लिए बता देते हैं कि एक स्कूटी या बाइक में दो से ज़्यादा लोग नहीं बैठने चाहिए.

12. पब्लिक में सिगरेट पीना

Source- News Track Live

पब्लिक में स्मोक करना प्रतिबंधित है, पर हम जब तक सिगरेट के धुंए का छल्ला बना कर लोगों पर नहीं फेंकेंगे, मज़ा कैसे आएगा?

13. दहेज का लेन-देन

Source- Wikipedia

सबको पता है कि दहेज का लेन-देन ग़ैरक़ानूनी है. हालांकि आज भी लोग मुंह खोलकर दहेज मांगते हैं, मजबूर होकर लोग देते भी हैं. कहीं-कहीं शादी करवाने वाले Mediator के भी पैसे Fixed होते हैं.

14. बंधुआ मज़दूरी

Source- Patrika

21वीं शताब्दी में भी ग़रीबों का फ़ायदा उठा कर उनसे बंधुआ मज़दूरी करवाई जाती है. आज भी बहुत से लोग कम पैसों में नौकरों से हद से ज़्यादा काम करवाते हैं. कुछ लोग तो उनका शारीरिक शोषण भी करते हैं.

15. बाल मज़दूरी

Source- IPS News

बाल मज़दूरी को जड़ से ख़त्म करने के लिए सरकारी और ग़ैरसरकारी संगठन तत्पर हैं, लेकिन वो तभी हो पायेगा जब हम अपने घरों पर 'छोटू' से काम करवाना बंद करेंगे.

16. ऐंबुलेंस को जगह न देना

Source- India Times

ये नैतिक ज़िम्मेदारी है और ट्रैफ़िक नियमों के अंतर्गत भी आता है, पर शायद ही कभी किसी ऐंबुलेंस को हम सड़क पर जगह देते हैं.

कैसे भाई जी? कैसे? जब तक ख़ुद को नहीं बदलोगे, तब तक बदलाव कैसे आएगा? बैठे-बैठे कभी कुछ हुआ है आज तक? नहीं न? तो फिर शिकायतें करना छोड़ो और अपनी तरफ़ से जितना बन पड़े करना शुरू करो. अगर इस सूची में कुछ जोड़ना चाहो, तो कमेंट कर सकते हो.

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