अभी कुछ दिन पहले ही बढ़ते साइबर क्राइम से परेशान होकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आखिर इंटरनेट पर अश्लील चीज़ों को अपलोड करने से कैसे रोका जाये? तभी इस मामले पर Google से आये सलाहकारों ने कहा है कि 195.30 करोड़ रुपये की लागत से साइबर क्राइम को मॉनिटर करने के लिए स्कीम लायी जा सकती है. इसमें सीनियर ऑफिसर एक्सपर्ट्स के तौर पर अपलोड की जाने वाले सारे कंटेंट पर नज़र रखेंगे.

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Google के इन Counsel ने एक सेंटर द्वारा फाइल किया गया एक एफिडेविट भी प्रस्तुत किया है, जिसमें साइबर क्राइम से निपटने के Salient Features का ज़िक्र है. इसके साथ इसमें इस बात का भी ज़िक्र है कि 195 करोड़ रुपये वाली ये स्कीम कैसे मॉनिटर करेगी. The Apex Court में 'इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्रियों से महिलाओं और बच्चों की गरिमा के नुकसान पर सुनवाई चल रही थी. तभी पीठासीन जजों ने Google से इस मामले में संभावित कदम उठाने का सुझाव मांगा. उस दौरान Google India को Represent कर रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने ऐसा कोई सुझाव न हो पाने पर खेद जताया. उनके अनुसार, System स्वचालित है और उसमें इंसानी हेर-फेर नहीं है.

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इसके बाद Google India ने बीते सोमवार को एक रिपोर्ट सबमिट की, जिसमें लिखा था कि अभी ये सब आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस पर आधारित है, इसलिए System स्वचालित है और उसमें इंसानी हेर-फेर नहीं है. लेकिन Algorthim के ज़रिये इसको मानव-निर्भर बनाया जा सकता है. फिर Search Engine उसके परमिशन पर काम करेगा.

इससे पहले कोर्ट ने इस पर बहुत ही सख्त़ रूख अपनाया था और Google को कहा था कि हमें इसका खात्मा चाहिए, इलाज नहीं. Google के अनुसार, एक दिन में लाखों वीडियो अपलोड किये जाते हैं, जिनमें से 20 तो Child Pornography होते हैं. इसलिए इस स्कीम से उन्हें वहीं ब्लॉक कर देने की कोशिश की जाएगी. इससे अधिकारी आसानी से इंटरनेट पर अपलोड किये जाने वाले कंटेंट्स पर नज़र रख पाएंगे.

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फ़िलहाल मामले की सुनवाई मार्च 6 तक लंबित कर दी गई है.

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