ख़्वाबों में ख़्वाब कहां नींदों में नींद कहां...

तू ही तो है, तू ही तो है...

पिछले कई दिनों से मैं सिर्फ़ इसी गाने को सुन रही हूं, पता नहीं क्यों... इस गाने में एक-एक शब्द अपने आप में एक गहरी बात को समेटे हुए है. इस गाने को सुनते हुए मेरे मन में एक ख़्याल आया कि आखिर ख्वाब है क्या? क्या ख़्वाब वो है जो हम सोते हुए देखते हैं, या फिर वो जो हम खुली आंखों से देखते हैं, या फिर वो जिसे पाने की ख़्वाहिश हम रखते हैं. पर अब समझ आया कि ख़्वाब सिर्फ सोते हुए नहीं देखा जाता है, बल्कि भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में जागते हुए हम अपनी ज़िन्दगी को जैसा रंग-बिरंगा बनाना चाहते हैं, और उन्हीं रंगों के पीछे भागते-भागते ज़िन्दगी का आधे से ज़्यादा हिस्सा गुज़ार देते हैं, वो भी ख़्वाब ही होता है.

ख़ैर, ख़्वाब एक बेहद खूबसूरत शब्द, पल, एहसास और ना जाने क्या-क्या है और इसी शब्द पर कई बड़े-बड़े शायरों द्वारा कहे गए कुछ चुनिंदा शेरों का खज़ाना आज हम आपके लिए लेकर आये हैं.

तो देर किस बात की है आप भी पढ़िए ये शेर:

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