2016 ख़त्म होने में कुछ ही दिन शेष हैं. कई यादों और उम्मीदों के इस साल में बहुत कुछ सीखने को मिला. करियर के लिहाज़ से यह साल मेरे लिए अच्छा रहा. इस साल मैंने बहुत प्रयोग किए और ज़्यादातर में सफ़ल भी रहा. पत्रकार होने के नाते आपको कई विषयों पर ध्यान देना पड़ता है, मगर सबसे अहम बात ये है कि इसमें ही संतुष्टि होती है. मुझे लगता है कि मैं अपने काम से काफ़ी संतुष्ट हूं. इस साल मैंने कई लोगों के इंटरव्यू लिए, ये वो लोग हैं, जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है. करियर के लिहाज से वे मेरे किसी मार्गदर्शक से कम नहीं हैं. मैं उनका ज़िक्र करना चाहता हूं.

विनोद कुमार चौधरी

विनोद चौधरी एक ऐसे शख़्स हैं, जो कभी नहीं हार मानते हैं. उनके अंदर सीखने की ललक देखी जा सकती है. इनसे सीखा जा सकता है कि तमाम विषम परिस्थितियों में कैसे सफ़लता के झंडे गाड़े जा सकते हैं. ये मेरी एक्सक्लुज़िव स्टोरी थी, जिसे टाइम्स ऑफ़ इंडिया जैसे ऑर्गनाइजेशन ने कवर किया. इसके अलावा देश के कई संस्थानों ने जगह दी.

ये थी वो स्टोरी

दो गिनीज़ रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले विनोद को पूरी दुनिया जानती है, मगर सरकार को इनकी ख़बर ही नहीं

अभिषेक दूबे

अभिषेक के बारे में बस इतना ही कहना चाहता हूं कि ईश्वर इनको हमेशा आगे बढ़ाएं. पढ़ाई करते हुए इन्होंने बेसहारा बच्चों को पढ़ाना शुरु किया. समाज में बहुत कम ऐसे लोग होते हैं, जो इस तरह की सोच रखते हैं, अभिषेक उनमें से एक हैं. अभी ये 'मुस्कान' नाम की एक संस्था चला रहे हैं, जो वास्तव में लोगों के चेहरे पर मुस्काल ला रही है.

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जिन्हें दुनिया ने कहा आवारा, उन्हें अभिषेक ने दिया सहारा, अब बच्चों के चेहरे पर झलक रही है ‘मुस्कान’

नितेश यादव

एक 14 साल के लड़के से क्या उम्मीद कर सकते हैं? यही न कि स्कूल जाए, खाना खाए, पढ़ाई करे और खेल. मगर नितिश अपने आप में ख़ास है. इस उम्र में वे 100 से ज़्यादा एप्लिकेशन बना चुके हैं. इस कारण वे कई जगह सम्मानित भी किए जा चुके हैं.

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अलवर के Google Boy नितेश कर रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार

यशराज और युवराज

यशराज और युवराज, ये जुड़वां भाई किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं. जिस उम्र में बच्चे कार्टून देखते हैं, उस उम्र में यशराज और युवराज ने विज्ञान से दोस्ती कर ली. इनकी दोस्ती कुछ इस कदर हुई कि अब वे इसी के हो गए. 7 साल की उम्र से विज्ञान के क्षेत्र में रिसर्च करनी शुरु की, जो अब तक जारी है और आगे भी जारी रहेगी.

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अपनी खोज से देश बदलना चाहते हैं 17 साल के जुड़वां भाई. 22 रिसर्च पेपर्स और 7 पेटेंट्स हैं इनके नाम

मुकेश राजपूत

मुकेश राजपूत जेएनयू से पर्यावरण विज्ञान में शोध कर रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के रहने वाले हैं. उनके गांव का नाम इन्दरापुरा है. वे अपने गांव को एक ऐसा आदर्श गांव बनाना चाहते हैं, जहां के निवासी आर्थिक, सामाजिक, कृषि और तकनीक के मामले में सबसे सशक्त हों. इस दिशा में वे निरंतर गांव के लोगों से बात कर रहे हैं. इनके काम करने के तरीकों के बारे में जान कर आपको अच्छा लगेगा.

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गांधी जी के सपनों का हिन्दुस्तान बनाना चाहता है, जेएनयू का एक छात्र

वैसे तो हमारे जीवन में कई लोग प्रेरणास्रोत होते हैं, मगर जिनसे हम सीखते हैं, वही हमारे लिए ज़्यादा महत्व रखते हैं. इन लोगों के बारे में जानना अच्छा रहा. ये मेरे लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है. हो सकता है कि आप इससे सहमत ना हों, मगर एक छोटी सी चींटी भी हमें जीना सिखा देती है. उम्मीद है कि 2017 इससे बेहतर हो. फ़िलहाल अपनी यादों को संजों कर रखें और उनसे सीखें. 2017 की शुभकामनाओं के साथ आपका बिक्रम सदैव आपकी सेवा में.