September 2016 की बात है. 24 वर्षीय, SIMS, पुणे MBA के छात्र जयदीप इंटर्नशिप कर रहे थे. उसी दौरान उन्हें एक अज्ञात नंबर(8169299426) से फ़ोन आया. फ़ोन करने वाले ने अपना नाम इम्तियाज़ अली बताया और जयदीप के सामने एक बड़ा ही अजीब सा ऑफ़र रखा. इम्तियाज़ ने जयदीप से कहा कि क्या वो अपनी किडनी 20 लाख रुपए में बेचेंगे?

जयदीप के होश उड़ गए और उन्होंने इस ऑफ़र को लेने से सख़्त मना कर दिया. फ़ोन करने वाले ने फ़ोन तो रख दिया पर फ़ोन रखने से पहले ये कहा कि जयदीप अगर कभी भी अपना किडनी बेचना चाहें तो [email protected] पर, Subject Line में 'I want to sell my kidney' लिखकर मेल कर सकते हैं.

जयदीप का ऐसा कोई इरादा नहीं था, फिर भी उन्होंने वो नंबर सेव कर लिया. जयदीप फ़ोन कॉल के बारे में भूल ही चुके थे, पर अपने दोस्त से बात करने पर उन्हें पता चला कि उनके दोस्त के पास भी वैसे ही फ़ोन कॉल्स आए थे. जयदीप ये समझ चुके थे कि ये बहुत बड़ा जाल है और उन्होंने इस पर कुछ करने की ठानी.

जयदीप ने The Better India से हुई बातचीत में बताया,

'मैं उस अजीब से फ़ोन के बारे में सोच ही रहा था कि न्यूज़ 24 चैनल पर भी उसी से जुड़ी ख़बर दिखाई जा रही थी. मैंने चैनलवालों को फ़ोन किया और उन्होंने आख़िर तक मेरी मदद की.'

न्यूज़ चैनल ने जयदीप को एक लोकल रिपोर्टर का फ़ोन नंबर दिया, जिसने जयदीप को दिल्ली स्थित Correspondent राहुल प्रकाश से संपर्क करवाया. अप्रैल, 2017 में Correspondent राहुल ने जयदीप से संपर्क किया और दिल्ली के चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन में दोनों ने शिकायत दर्ज की.

सब इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह ने जयदीप को किडनी रैकेट वालों से संपर्क करने को कहा. रैकेट वाले पुलिस के जाल में फंस गए और जयदीप की किडनी बेचने की पूरी प्रक्रिया शुरू कर दी.

भारत में किडनी डोनेट करने की प्रक्रिया से जुड़े कई क़ानूनी दांव-पेंच जुड़ें हैं. जयदीप को अपनी पहचान बदलनी पड़ी, उसे एक मरीज़ के बेटे की पहचान दी गई.

कि़डनी के सौदागरों ने जयदीप का फ़ेक आधार कार्ड से लेकर फ़र्ज़ी बैंक पासबुक तक बनवाई. जयदीप को एक नया नाम भी दिया गया, P.Sp Phani Kumar.

जयदीप को सबसे पहले लोकल लैब में जांच के लिए ले जाया गया, उसके बाद बत्रा अस्पताल ले जाया गया, जहां जयदीप का ऑपरेशन होना था. जयदीप के 17 टेस्ट लैब में हुए और फिर 17 टेस्ट अस्पताल में भी किए गए. उसके शरीर से लगभग 3 लिटर खून निकाला गया.

कि़डनी डोनेट करने से पहले जयदीप को IMA (Indian Medical Association) के मेमर्बस को इंटरव्यू देना था. जयदीप ने ये भी बताया कि उसे सवालों के जवाब देने के लिए भी ट्रेनिंग दी गई थी. ठीक मुन्ना भाई फ़िल्म के जैसे, जिस Sequence में मेमबर्स सवाल पूछेंगे, उसी Sequence में उसे जवाब याद करवाए गए थे.

जयदीप को क्राइम ब्रांच वालों ने कहा था कि वो कुछ सवालों का ग़लत जवाब दे, ताकि ये पता चले कि क्या अस्पताल के स्टाफ़ में से भी कोई रैकेट से जुड़ा हुआ है.

जयदीप ने वैसा ही किया, उन्होंने अपना और अपने पिता का नाम तो सही बताया, पर उसके पिता पहले किस अस्पताल में भर्ती थे, इसका जवाब उसने ग़लत दिया. अपने स्कूल का नाम और अपना पता भी उसने सकपकाते हुए बताया. इतनी ग़लतियों के बावजूद जयदीप की एप्लीकेशन को खारिज नहीं किया गया. जयदीप का इंटरव्यू 22 मई को लिया गया था, ऑपरेशन से ठीक 3 दिन पहले. पूरी घटना पर क्राइम ब्रांच ने कड़ी नज़र रखी हुई थी, एक भी ग़लती का मतलब था जयदीप की जान को ख़तरा.

किडनी के रैकेट वालों का अपना फ़ेसबुक पेज और 6 वेबसाइट्स भी थीं. इन सब पर क्राइम ब्रांच वालों ने कड़ी नज़र रखी हुई थी. ये लोग ऐसे लोगों कि तलाश करते थे, जो किडनी अस्पताल के बारे में सर्च करते थे. बहुत सारे पैसों का लालच देकर ये लोग मासूम लोगों को अपने जाल में फंसाते थे.

25 मई, 2017 को जब जयदीप ऑपरेशन थियेटर में जाने ही वाले थे तब क्राइम ब्रांच ने किडनी रैकेट से जुड़े 6 लोगों को गिरफ़्तार किया. पुलिस मुजरिमों से पूछताछ कर रही है और अस्पताल में भी जांच कर रही है.

Source: Indian Express

जयदीप ने अपनी जान पर खेलकर न जाने कितने लोगों की जान बचाई. जयदीप की इस वीरता को ग़ज़बपोस्ट की पूरी टीम सलाम करती है.

Source: The Better India

Feature Image Source: HT, Indian Express