स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, ऑफ़िस, सड़क पर चलते, मेट्रो में, ट्रेन में, अपने अपनों के पास अपने घर में आख़िर कोई ऐसी जगह है क्या जहां एक लड़की सुरक्षित है? है कोई जगह जहां लड़कियां सुरक्षित महसूस करते हुए सुकून की सांस ले सकती हैं? ये सवाल आज बिहार के मुजफ्फरपुर से आ रही एक ख़बर पढ़ने के बाद बार-बार दिमाग़ में कौंध रहा है.

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मुजफ्फरपुर में स्थित बालिका गृह सेवा संकल्प एवं विकास समिति में सालों से लड़कियों का यौनशोषण होता आ रहा है. और जब एक लड़की ने अपने साथ होने वाले यौन शोषण का विराध किया, तो उसको तब तक बेरहमी से पीटा गया, जब तक कि उसकी जान नहीं चली गई. इतना ही नहीं उसकी मौत के बाद उसको आनन-फ़ानन में बाल संरक्षण गृह के लीची के बागीचे में ही दफ़ना दिया गया. अब पुलिस बालिका गृह में उस जगह की खुदाई कर रही है जहां उस लड़की को दफ़नाया गया था.

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पाक्सो कोर्ट ने इसके लिए एक मैजिस्ट्रेट को भी नियुक्त किया है. इसके साथ ही कोर्ट ने मुजफ्फरपुर के डीएम मोहम्मद सुहैल को आदेश दिया है कि मैजिस्ट्रेट की निगरानी में पूरी खुदाई की वीडियोग्राफ़ी भी करवाई जाएगी.

कैसे हुआ बालिका गृह में होने वाले शोषण का खुलासा?

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दरअसल, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़, जो मुंबई की एक संस्था है, काम है सोशल ऑडिट करना. और इसी संस्था की एक टीम 'कोशिश' ने 2017-18 में बिहार के सभी बालिका गृहों का सोशल ऑडिट किया था. बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा मिले निर्देशों के बाद ही ये ऑडिट किया गया था. ऑडिट ख़त्म होने के बाद इस टीम ने 15 मार्च को बिहार सरकार को पूरे 100 पन्नों की ऑडिट रिपोर्ट भेजी थी, जिसके पेज नंबर 51 पर इस बात का ज़िक्र किया गया था कि मुजफ्फरपुर में स्थित बालिका गृह सेवा संकल्प एवं विकास समिति में लड़कियों का यौन शोषण हो रहा है. रिपोर्ट के साथ ही इस स्वयंसेवी संस्था सेवा संस्थान संकल्प एवं विकास समिति के ख़िलाफ़ कार्यवाई और केस दर्ज करने के साथ ही पूरे मामले की जांच करवाने की बात भी की गई थी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिपोर्ट की एक कॉपी मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन को भी 26 मई को सौंपी गई थी. इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन ने भी अपनी प्राथमिक जांच में कोशिश टीम के द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की पुष्टि की.

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इसके बाद ही 31 मई 2018 को मुजफ्फरपुर के बाल संरक्षण के सहायक निदेशक दिवेश शर्मा के निर्देश पर बालिका गृह सेवा संकल्प एवं विकास समिति के संचालक ब्रजेश ठाकुर और विनीत और संस्था के कर्मचारियों-अधिकारियों पर यौन शोषण, आपराधिक षड्यंत्र और पॉक्सो ऐक्ट के तहत महिला थाने में केस दर्ज किया गया. इस पूरे मामले की जांच की ज़िम्मेदारी महिला थाने की थानेदार ज्योति कुमारी को दी गई.

30 मई, 2018 को 87 में से 44 लड़कियों को किया गया ट्रांसफर

लेकिन केस दर्ज होने से एक दिन पहले यानि 30 मई 2018 को ही समाज कल्याण विभाग के दख़ल देने के बाद बालिका गृह की 87 बच्चियों में से 44 बच्चियों को दूसरी जगहों पर भेज दिया गया. 44 लड़कियों में से 14 को मधुबनी, 14 को मोकामा और 16 को पटना जिले में भेजा गया.

2 जून को लग गया बालिका गृह में ताला

2 जून को सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी, जिसका संचालन एसपी सिटी यूएन वर्मा कर रहे थे, का गठन किया गया. वर्मा टीम ने 2 जून को बालिका गृह में छापे मारा. और बालिका गृह के संचालक ब्रजेश ठाकुर और विनीत के साथ ही वहां की आठ महिलाओं से थाने में पूछताछ की गई. वहीं डीएसपी मुकुल रंजन और महिला थाने की थानेदार ज्योति कुमारी ने साहू रोड स्थित बालिका गृह सेवा संकल्प एवं विकास समिति के ऑफ़िस से विज़िटर रजिस्टर, स्टाफ़ रजिस्टर, एक कैसेट और कई कागज़ातों को सबूत के तरु पर इकठ्ठा किया. और 2 जून की दोपहर को ही 3 बजे के आस पास करीब टीम एसएसपी हरप्रीत कौर के साथ बालिका गृह पहुंची और निरिक्षण के बाद वहां ताला लगा दिया. और 3 जून को पुलिस ने ब्रजेश ठाकुर समेत वहां काम करने वाली किरण कुमारी, चंदा कुमारी, मंजू देवी, इंदु कुमारी, हेमा मसीह, मीनू देवी और नेहा को हिरासत में ले लिया.

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हर किसी को कार्यवाही के दौरान इसी बात के संकेत मिल रहे थे कि इस बालिका गृह में बहुत कुछ ऐसा है जो गड़बड़ है. और ये बात सच भी निकली क्योंकि यहां मासूमों का यौनशोषण तो हो ही रहा था, साथ ही बालिका गृह की 29 लड़कियों का बलात्कार भी हो रहा था. जब इन बच्चियों का मेडिकल टेस्ट कराया गया, तब बलात्कार की पुष्टि होने के साथ-साथ 3 बच्चियों के गर्भवती होने की बात भी सामने आई. बलात्कार की बात उन लड़कियों से हुई पूछताछ के दौरान सामने आई, जिनको मधुबनी, मोकामा और पटना भेजा गया था.

बच्चियों ने दिए दिल-दहला देने वाले बयान

25 जून को कोर्ट में धारा 164 के तहत दिए इन बच्चियों के बयानों के से पता चला कि बालिका गृह में उनको पॉर्न दिखाया जाता था. और उसके बाद एक आंटी उनको नशे का इंजेक्शन देती थी. ये आंटी बालिका गृह में काम करने वाली मधु थी. इंजेक्शन के बाद एक आदमी उनको गार्डन में ले जाता था, जहां उनका शोषण किया जाता था. इतना ही नहीं बालिका गृह में काम करने वाली औरतें भी इन मासूमों का यौन शोषण करती थीं. इसके साथ ही लड़कियों ने बताया कि मंगलवार को काउंसलिंग के बहाने उनको बालिका गृह से बाहर ले जाया जाता था, और उनका ग़लत फायदा उठाया जाता था. बच्चियों के बयान के बाद कोर्ट के आदेश पर पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में सभी लड़कियों का मेडिकल हुआ. जिसके बाद पुष्टि हुई कि बालिका गृह में 29 बच्चियों के साथ रेप हुआ है, जिनमें से एक की उम्र महज सात साल है.

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क्यों भेजा जाता है लड़कियों को बालिका गृह?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बाल संरक्षण गृह में ऐसी बच्चियों को रखा जाता है, जिनके साथ कोई ग़लत काम हुआ होता है या फिर या उनको जो किसी भी तरह के अपराध में शामिल होती हैं. यहां लड़कियों को 3 से 6 महीनों के लिए सुधार लाने के लिए रखा जाता है. बच्चियों में सुधार लाने के लिए पढ़ाई से लेकर उनको स्वास्थ्य सम्बंधित सभी सुविधाएं दी जाती हैं. यहां पर बच्चियों को ड्राइंग, सिलाई-कढ़ाई से लेकर दूसरी कई तरह की ट्रेनिंग भी दी जाती हैं. ताकि वो अपना भविष्य उज्वल बना सकें और अपने पैरों पर खड़ी हो सकें.

शुरुआत से कभी भी नहीं हुआ संस्था का ऑडिट

आपकी जानकारी के लिए ये भी बता दें कि नियम के अनुसार इस तरह की हर संस्था का हर तीन साल में ऑडिट होना चाहिए और उसके बाद ही इनको फ़ंड दिया जाना चाहिए. लेकिन इस बालिका गृह सेवा संकल्प एवं विकास समिति को पहली बार सरकार की ओर से 31 अक्टूबर 2013 को काम मिला था और इन 6 सालों में इसका एक भी बार ऑडिट नहीं किया गया पर हर छह महीनों में इसको लगभग 19 लाख रुपयों का फ़ंड मिलता रहा. इतना ही नहीं संस्था के कर्मचारियों की पगार के लिए भी अलग से हर साल 14 लाख 2 हज़ार रुपये मिलते रहे. पर हैरानी वाली बात ये है कि जिस शख्स को इसके ऑडिट की ज़िम्मेदारी दी गई उसने कभी कोई ऑडिट किया ही नहीं, और संस्था को पैसे दिलवाता रहा और ख़ुद भी खाता रहा. इस शख्स का नाम रवि रौशन है, जी फ़िलहाल पुलिस की हिरासत में है.

इसको देखते हुए ये कहना ग़लत नहीं होगा कि इस संस्था को इस तरह के गैर-कानूनी कामों के लिए बड़े-बड़े और पावरफुल लोगों की शय मिली हुई है, तभी तो पिछले छह सालों से यहां मासूमों के साथ यौनशोषण और बलात्कार होता रहा. लेकिन मामले को हमेशा दबा दिया गया. पिछले दो महीनों से इस मामले मैं आये दिन नए खुलासे हो रहे हैं और अभी आगे-आगे न जाने किस-किस का नाम इस मामले में सामने आएगा कहा नहीं जा सकता.

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हालांकि, सीएम नितीश कुमार ने कहा है कि किसी को भी बख़्शा नहीं जाएगा. इससे आशा की जा सकती है कि इन सब्वहि बच्चियों के गुनहगारों को जल्द से जल्द जेल में डाला जाएगा और बच्चियों को न्याय मिलेगा.

लेकिन मुजफ्फरपुर के इस बालिका गृह का राग पूरी तरह से उल्टा था, क्योंकि यहां मासूम बच्चियों के भविष्य को संवारने के बजाए, उसके साथ खिलवाड़ किया जा रहा था. इस घटना को लेकर भी लोग राजनीतिक पैंतरे चल रहे हैं. वैसे देखा जाए तो राज्य सरकार को बालिका गृह में बच्चियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के बारे में पता था, लेकिन बावजूद इसके इस संस्था के ख़िलाफ़ कोई वाजिफ़ एक्शन नहीं लिया गया और अब जब वहां एक बच्ची को मौत के घाट उतार दिया गया, तब ये नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करके अपनी अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने में लगे हैं...!

इसका ज़िम्मेदार कौन है, ये एक सोचने वाली बात है...

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