बच्चों का ख़ून दिखाई नहीं देता,

मंदिर-मस्जिद पर देश बंटता जाता है...

हम अभी गोरखपुर के 70 से ज़्यादा बच्चों की सामूहिक हत्या से उबर भी नहीं पाए थे कि रायपुर में भी इसी तरह के हत्याओं की ख़बर आ गई. माफ़ करियेगा पर हम ये नहीं मानते कि उन बच्चों की मौत प्राकृतिक थी, उन्हें चंद भ्रष्ट लोगों की लालच की बलि चढ़ना पड़ा था.

रायपुर के बी.आर.अंबेडकर अस्पताल में रविवार रात को ऑक्सीजन सप्लाई का प्रेशर कम हो जाने से Special Care Unit में 3 बच्चों की मृत्यु हो गई. अस्पताल के अधिकारियों ने इस पूरे घटना से इंकार किया और कहा कि बच्चों की मृत्यु बीमारी से ही हुई है. गौरतलब है कि अस्पताल प्रशासन ने ऑक्सीजन सप्लाई के इंचार्ज, एक ऑपरेटर को बरख़ास्त कर दिया.

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Health Services के डायरेक्टर, आर.प्रसन्ना ने रिपोर्टर्स को बताया,

'जैसे ही डॉक्टरों को ऑक्सीजन प्रेशर के गिरने की बात पता चली वैसे ही सारे डॉक्टर हरकत में आ गये. CMO और Superitendent ने पूरे मामले को संभाल लिया. बच्चों की मृत्यु बीमारी से हुई है.'

मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

मृत बच्चों में एक ऐसा बच्चा भी था जिसकी उम्र सिर्फ़ 5 दिन थी और उसे दिल की बीमारी थी. बच्चे के पिता ने बताया कि बच्चे के दिल में छेद था.

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कुछ दिनों पहले ही गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में 70 से ज़्यादा बच्चों की ऑक्सीजन की कमी के कारण मृत्यु हो गई थी. इन घटनाओं से साफ़ है कि सरकारी महकमे को बच्चों की जान की परवाह नहीं है. जिस देश में पशुओं को इंसानों से अधिक महत्त्व दिया जाए, वहां बच्चों की भलाई के बारे में सोचने का वक़्त किसके पास है?

हमें भी अब ऐसी ख़बरों का आदी हो जाना चाहिए, क्योंकि सरकारी मुलाज़िम तो अपना दामन बचाने में लगे रहेंगे और समस्या बनी रहेगी.

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