अमेरिका में एक नया रेगुलेशन लागू किया गया है, जिसमें ऐसा प्रावधान है कि दाढ़ी रखने वाले और पगड़ी या हिजाब पहनने वाले लोग भी मिलिट्री में भर्ती हो सकते हैं. इस रेगुलेशन के लागू होने के अगले ही दिन पांच सिखों की US आर्मी में भर्ती को हरी झंडी मिल गयी है. सिखों के लिए ये एक नए युग की शुरुआत जैसा है. 1981 में मिनिस्ट्री ऑफ़ डिफेन्स ने Article Of Faith को बैन कर दिया था. फिर इस साल चार जनवरी को इस सरकारी रुकावट को तोड़ते हुए ये नया नियम लागू कर दिया गया. ऐसा माना जा रहा है कि इसको करने के पीछे ये दिखाना है कि सिखों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता.

आर्मी के सेक्रेटरी Eric fanning ने ब्रिगेडियर लेवल तक के अधिकारियों के लिए ये सुविधा प्रदान करने की घोषणा की है. पहले ये सेक्रेटरी के लेवल तक ही था. इस नए नियम के घोषणा के बाद सिखों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई.

लगातार 35 सालों तक सिखों को देश की कई जगहों से दूर रखने वाली इस शर्मनाक पॉलिसी को हटाने का ये कदम देश की प्रगतिशीलता और धनी डाइवर्सिटी का सूचक है. हमने बहुत पहले ही सोचा था कि ये पॉलिसी हट जाये और यहां रहने वाले हर धर्म के लोग और अल्पसंख्यक बिना किसी भेदभाव के देश की सेवा कर सकें. - हरसिमरन कौर, Legal Director, Sikh Coalition

Sikh Coalition के अनुसार, इस नए रेगुलेशन के आने के बाद कुल 14 सिख US आर्मी से जुड़े हैं. बहुत ही जल्द और भी कई सिख अपने धार्मिक महत्व के साथ देश की भी सेवा करेंगे. अब तो सिख ब्रिगेडियर लेवल तक जा सकते हैं. लेकिन मिनिस्ट्री ऑफ़ डिफेन्स ने ऐसा भी कहा है कि अगर देश की सुरक्षा नीतियों को इससे कोई खतरा महसूस होता है, तो इस फ़ैसले को वापस भी ले सकते हैं.

आपको बता दें कि Sikh Coalition और McDermott Will & Emery 2009 से ही सिखों के साथ हो रहे भेदभाव के लिए लड़ रहे हैं. 2014 में इनके साथ Becket Law भी जुड़ गया था, तब से इनका पक्ष और मजबूत हो गया. संभव है कि इस कदम से अमेरिका में सिखों को एक नई पहचान मिले.