गोरखपुर, छत्तीसगढ़ के बाद अब स्टील सिटी जमशेदपुर में भी मासूम बच्चों की मौत की ख़बर आई है. इन घटनाओं से अभी हम उबर भी नहीं पाए थे कि विकसित कहे जाने वाले जमशेदपुर में भी एक साथ कई बच्चों की मौत की ख़बर ने सबको चौंका दिया है.

जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल कॉलेज में पिछले 30 दिनों के अंदर 52 बच्चों की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि ये मौतें कुपोषण के कारण हुई हैं.

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कुपोषण देश में एक गंभीर समस्या है. हर साल कुपोषण के कारण की मासूम बच्चों की मौत होती है. सरकार ने कई कड़े कदम भी उठाए, कई पॉलिसियां भी बनाई. पर ये तो हम आप सभी जानते हैं कि पॉलिसी और पैसों का क्या होता है.

गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में 3 दिनों के अंदर 70 से ज़्यादा बच्चों की, ऑक्सीजन के अभाव में मौत हो गई थी. इस घटना के बाद देश भर में हड़कंप मच गया था. गौरतलब है कि उन मासूमों को इंसाफ़ के नाम पर सिर्फ़ दिलासा ही दी गई. सत्ताधारियों ने ज़िम्मेदारी लेने के बजाय अपना दामन बचाया. बर्खास्तगी भी हुई पर घटना की गंभीरता को नज़रअंदाज़ किया गया.

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इस घटना के कुछ दिनों बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई का प्रेशर कम होने के कारण 3 नवजात बच्चों की जान चली गई.

ख़ैर बच्चों की जान जिस देश में जानवरों से भी सस्ती हो, वहां के बारे और क्या ही कहा जाए?

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