शुक्रवार को अमृतसर में जौरा फाटक के पास एक दुखद घटना में 60 लोगों की मौत हो गई. लोग दशहरा के मौके पर रावण का पुतला जलाने के लिए इकट्ठा हुए थे. रावण का पुतला पटरी के पास ही रखा गया. कई लोग पटरी पर खड़े हुए रावण को जलते हुए देख रहे थे तभी एक तेज़ रफ़्तार ट्रेन वहां से गुज़री और करीब सौ लोग उसकी चपेट में आ गए. राज्य के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं.

ये घटना धोभी घाट के पास शाम 6:45 के करीब हुई. एक चश्मदीद के अनुसार, घटनास्थल पर 300 से भी ज़्यादा लोग मौजूद थे. पटाखों की आवाज़ की वजह से उन्हें ट्रेन के आने की आवाज़ सुनाई नहीं दी. इस हादसे में लगभग 72 लोग बुरी तरह घायल हुए हैं.

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एक रेलवे अधिकारी ने बताया कि रावण का पुतला रेलवे ट्रैक के 70-80 मीटर के दायरे में जला रहा थे, जलने के वक़्त जब पुतला गिरा तब लोग ट्रैक की ओर बढ़ने लगे. तभी ये हादसा हुआ.

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वहां मौजूद एक व्यक्ति ने ANI से बातचीत के दौरान प्रशासन और दशहरा समीति को हादसे के लिए ज़िम्मेदार ठहराया. उस समारोह में स्थानीय विधायक नवजोत कौर सिद्धु भी उपस्थीत थी, घटना के बाद आक्रोशित भीड़ ने उनके खिलाफ़ भी नारे लगाए.

मुख्यमंत्री ने मृत्कों के परिवार को पांच लाख और घायलों का मुफ़्त इलाज(निजी अस्पताल में भी) दकी घोषणा की है. रेल मंत्री पियूष गोयल ने कहा कि रेलवे राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है. हादसे के वक्त वो अमेरिका में थे, वो भारत वापस आ रहे हैं.

सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो भी मौजूद है, जिसमें रावण के जलने और ट्रेन के गुज़रने की पूरी रिकॉर्डिंग मौजूद है.

चेतावनी: ये वीडियो संवेदनशील है.