फ़िल्में समाज का आईना हैं और समलैंगिकता समाज का एक सच. इसीलिए बॉलीवुड में भी कई बार इस संवेदनशील विषय पर फ़िल्में बनी हैं. भारत में समलैंगिकता को अब तक क़ानूनी मान्यता नहीं मिल पाई है, जिसका कारण समाज में समलैंगिकों को लेकर फैली भ्रांतियां और लोगों के पूर्वाग्रह हैं.

बॉलीवुड की कुछ ऐसी फ़िल्में, जिनमें समलैंगिकों की ज़िन्दगी दिखाकर, समाज में उनके प्रति बने कई पूर्वाग्रहों को तोड़ने की कोशिश की गई है.

1. 'अलीगढ़' में मनोज बाजपेई का किरदार

अलीगढ़ में मनोज बाजपेई 'प्रोफ़ेसर रामचंद्र सिरस' के किरदार में हैं, जो 'अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी' के प्रोफ़ेसर हैं. फ़िल्म में मनोज का एक रिक्शे वाले के साथ समलैंगिक संबंध बनाते हुए वीडियो वायरल हुआ था. फ़िल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक व्यक्ति को समलैंगिक होने के कारण समाज के ताने सहने पड़ते हैं. ये फ़िल्म सत्य घटना पर आधारित थी.

2. 'कपूर एंड संस' में फ़वाद ख़ान का किरदार

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फ़िल्म 'कपूर एंड संस' में अभिनेता फ़वाद ख़ान 'राहुल कपूर' नाम के एक Gay के किरदार में हैं. ज़्यादातर लोग समझते हैं कि जो लोग Gay होते हैं, वो हमेशा मर्दों के साथ चिपके रहना चाहते हैं. उन्हें घर-परिवार से कोई ख़ास मतलब नहीं होता, न ही घर वाले उनकी फ़िक्र करते हैं. मगर इस फ़िल्म में फ़वाद ने अपने किरदार से ये सारे मिथक तोड़ दिए. फ़िल्म में दिखाया गया है कि समलैंगिकों की ज़िन्दगी भी उतनी ही सामान्य होती है, जितनी बाकी लोगों की.

3. 'बॉम्बे टॉकीज़' में रणदीप हुड्डा का किरदार

फ़िल्म में रणदीप हुड्डा 'देव' और साक़िब सलीम 'अविनाश' के किरदार में हैं. फ़िल्म में दोनों पुरुष किरदार एक-दूसरे से प्यार करते हैं. देव (रणदीप) की शादी गायत्री (रानी मुखर्जी) से होती है. चूंकि देव Gay है, इसलिए दोनों के बीच रिश्ते अच्छे नहीं बन पाते. पर एक दिन गायत्री को सच पता चलता है और यहीं पर फ़िल्म ख़त्म हो जाती है. फ़िल्म के क्लाइमैक्स को देखकर लगता है कि रानी अपने पति को छोड़ देती हैं, पर फ़िल्म के अंत का निर्णय दर्शकों पर ही छोड़ दिया गया है.

4. 'फ़ैशन' में समीर सोनी का किरदार

अगर आपको लगता है कि हाई सोसाइटी में में लोग समलैंगिकता और इसकी बातों को लेकर सहज होते हैं, तो आप ग़लत हैं. फ़िल्म में समीर सोनी 'राहुल अरोरा' के किरदार में हैं, जो एक डिज़ाइनर है. उन्हें परिवार के दबाव में शादी करनी पड़ती है, जिसके बाद उनकी ज़िन्दगी अच्छी नहीं चलती. फ़िल्म में दिखाया गया है कि पैसा और शोहरत होने के बाद भी समलैंगिकों को बड़ी सोसाइटी में अलग नज़र से देखा जाता है.

5. 'LOEV' में शिव पंडित का किरदार

फ़िल्म में शिव पंडित 'जय' के और ध्रुव गणेश 'साहिल' के किरदार में हैं. फ़िल्म में दिखाया गया है कि हर रिश्ते के जैसे ही Gay Couple के रिश्तों में भी तरह-तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं. उन्हें भी अपने साथी के पास किसी और के आने से जलन होती है और वो भी Insecure महसूस करते हैं.

6. 'I am' में राहुल बोस का किरदार

फ़िल्म में अलग-अलग विषयों पर 4 कहानियां हैं. इनमें से 'I am Omar' में समलैंगिकता का मुद्दा उठाया गया है. फ़िल्म में दिखाया गया है कि समलैंगिकों के साथ भारतीय समाज कैसा व्यवहार करता है और वो इस समाज के पूर्वाग्रहों का रोज़ किस तरह सामना करते हैं.

7. 'My Brother... Nikhil' में संजय सूरी का किरदार

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इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि Gay कपल का प्यार भी आम लड़के-लड़की के प्यार जैसा ही होता है. उनकी भावनाओं में कोई बदलाव नहीं होता. फ़िल्म में संजय सूरी 'निखिल कपूर' के किरदार में हैं, जो एक स्विमिंग चैंपियन है. फ़िल्म में निखिल को एड्स हो जाता है, जिसकी वजह से उसका परिवार और दोस्त सब उससे किनारा कर लेते हैं. ऐसे समय में जो दो लोग उसके साथ खड़े होते हैं वो हैं उसकी बहन और उसका प्यार Nigel (पूरब कोहली).

इन सभी फ़िल्मों के समलैंगिक किरदारों ने ये बताने की कोशिश की है कि समाज के अन्य लोगों की तरह उन्हें भी सामान्य ज़िन्दगी जीने का अधिकार है. समाज का कुछ लोगों के प्रति सिर्फ़ इसलिए ग़लत नज़रिया होना, क्योंकि वो समलैंगिक हैं, एक प्रगतिशील समाज की सोच नहीं हो सकती.

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