माता-पिता अपने बच्चों की ख़ातिर न जाने क्या-क्या कर जाते हैं. हमारे पेरेंट्स चाहे हमसे कितना भी गुस्सा क्यों न हों. ये बात सच है कि बच्चों की छोटी से छोटी ख़ुशी में ही मां-बाप की ख़ुशी होती है. लेकिन तब क्या, जब एक पिता अपने एकलौते बेटे को खोने के ग़म में लोगों को जीने की राह सिखा रहा हो. जी हां, ये घटना दिल्ली के एक परिवार के साथ हुई है.

बीते सोमवार को दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत Traffic Sentinel Scheme की शुरुआत की. इसके लिए उन्होंने 319 वॉलिंटियर्स की नियुक्ति भी की है, जो स्वेच्छा से ट्रैफ़िक पुलिस को यातायात नियंत्रण और प्रबंधन के लिए अपनी सेवाएं देंगे.

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लेकिन इन वॉलिंटियर्स में से एक दिल्ली के सीलमपुर के 72 वर्षीय बुज़ुर्ग गंगा राम भी हैं. 72 साल का ये बुज़ुर्ग कैसे ट्रैफ़िक कंट्रोल कर सकता है? हर किसी के मन में यही सवाल उठेगा. लेकिन गंगा राम के इस काम को करने के पीछे एक दर्दनाक कहानी छुपी है. दरअसल, 3 साल पहले उन्होंने अपने इकलौते बेटे को रोड क्रॉसिंग दौरान हुए एक हादसे में खो दिया था.

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पेशे से टीवी मैकेनिक ने गंगा राम उस दिन से आजतक लगातार सीलमपुर इलाके में यातायात नियंत्रण का काम करते आ रहे हैं. उनका कहना है कि जिस तरह उन्होंने अपने बेटे को खो दिया, वो नहीं चाहते कि किसी और परिवार के साथ ऐसा हो. इसलिए वो पिछले 3 सालों से इस काम को कर रहे हैं. जबकि सोमवार से गंगा राम आधिकारिक तौर पर 318 अन्य वॉलिंटियर्स के साथ यातायात नियंत्रण करने में दिल्ली पुलिस की मदद करेंगे. इस दौरान दिल्ली पुलिस ने सभी वॉलिंटियर्स को यातायात पुलिस की सहायता के लिए फ़्लोरोसेंट जैकेट, कैप्स और पहचान पत्र भी दिए हैं.

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यातायात प्रेषकों को बधाई देते हुए और उन्हें दिल्ली यातायात पुलिस के साथ निकट समन्वय में काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए आयुक्त पटनायक ने कहा कि उन्हें आशा है कि ये योजना अधिक नागरिकों के साथ आगे बढ़ेगी और यातायात के विनियमन और प्रबंधन पर प्रभाव डालेगी.

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दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक ने सभी वॉलिंटियर्स को शुभकामनायें देते हुए कहा कि सभी लोग हमारी इस पहल में सहयोग करें ताकि शहर के बढ़ते ट्रैफ़िक को कम किया जा सके. हम इस योजना को और आगे ले जाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि भविष्य में और भी लोग हमारे साथ जुड़ सकें.

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