आपने अकसर अपने आस-पास ऐसे लोगों को देखा, जो अपने मनोरंजन के लिए जानवरों के साथ बुरा बर्ताव करते हैं. कारण है Prevention of Cruelty to Animals Act 1960 का कमजोर होना. इसके तहत कोई भी व्यक्ति महज़ 50 रुपये का जुर्माना देकर आसानी से इस तरह की हरकत कर बच सकता है. जबकि दुनिया के कई देशों में ऐसा करने पर जुर्माना और जेल भी हो सकती है.

आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ देशों के बारे में जो जानवरों के लिए रहने के लिहाज़ से बेस्ट हैं.

ऑस्ट्रिया

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ऑस्ट्रिया जानवरों के रहने के लिए किसी जन्नत से कम नहीं. Austrian Animal Welfare Act 2004 में जानवरों को वहां इंसानों जैसा दर्जा हासिल है. वहां कोई भी व्यक्ति अपने पालतु पशु की पूंछ नहीं काट सकता, उसका कान तक नहीं मरोड़ सकता. यहां तक कि मुर्गियों तक को कैद करने की इजाज़त नहीं है. अगर कोई इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे 2,420 डॉलर का जुर्माना देना होता है. जानवरों के साथ क्रूरता की हद पार करने पर 18,160 डॉलर का फ़ाइन देना पड़ सकता है.

स्विट्ज़रलैंड

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स्विट्ज़रलैंड पशुओं की मर्यादा भंग करने वालों के लिए सज़ा मुकर्रर करने वाला पहला देश है. वहां अगर कोई Pet Owner अपने कुत्ते को भौंकने से भी मना करता है, तो उसे काउंसलिंग क्लासेज़ अटेंड करनी पड़ती हैं. इसमें लोगों को जानवरों से कैसे बर्ताव करना चाहिए, ये सिखाया जाता है. साथ ही वहां की सरकार कुछ जानवरों को अंकित कर उन्हें जोड़े में रखने का आदेश देती है.

यूनाइटेड किंग्डम

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यूके के Animal Welfare Legislation में जानवरों से क्रूरता करने को लेकर बहुत ही सख़्त प्रावधान किए गए हैं. अगर कोई नागरिक ऐसा करता है तो उसे 52 सप्ताह की जेल और आजीवन पालतु पशु न रखने की सज़ा दी जाती है. 20,000 पाउंड का जुर्माना अलग से देना होगा.

जर्मनी

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जर्मनी यूरोपियन यूनियन में जानवरों को संवैधानिक संरक्षण देने वाला पहला देश है. वहां के संविधान के अनुसार, जर्मनी में पाए जाने वाले सभी प्रकार के जानवरों की रक्षा करना सरकार की सबसे बड़ी Priority है.

नीदरलैंड

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यहां भी जानवरों के साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाती. एनिमल वेलफ़ेयर एक्ट इस पर निगरानी रखता है. इतना ही नहीं, यहां पर बंदरों पर किसी भी प्रकार की दवाईयों को टेस्ट करना भी बैन है.

स्वीडन

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स्वीडन में किसी भी जानवर को बूचड़खाने में हलाल करने से पहले उसे बेहोश करना ज़रूरी है. यहां पर सभी पालतु जानवरों को नियमित भोजन देना अनिवार्य है. साथ ही गर्मियों के दौरान उन्हें बाहर चराहगाह में चरने के लिए छोड़ना पड़ता है.

डेनमार्क

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डेनमार्क में जानवरों को हलाल करना बैन है. हाल ही में उन्होंने अपने एनिमल वेलफेयर एक्ट में इसका प्रावधान किया है. यहां पर Animal Farming को लेकर भी सख़्त कानून बनाए गए हैं.

हॉन्गकॉन्ग

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हॉन्गकॉन्ग की सरकार सभी प्रकार के पशुओं पर तगड़ी निगरानी रखती है, फिर चाहे बात मांस के लिए हलाल किए जाने वाले पशुओं की हो या फिर जंगली जानवरों की. वहां पशुओं के साथ दुर्व्यवहार, क्रूरता, लड़ाई, ग़लत तरीके से ट्रांस्पोर्ट करने पर करोड़ों रुपये का जुर्माना देना पड़ता है. साथ ही 3 साल की जेल भी हो सकती है.

क्या हमारी सरकार इनसे सीख लेकर Prevention of Cruelty to Animals Act 1960 को और सख़्त नहीं बना सकती?