सभ्य समाज के वासी होने का दंभ भरने वाले लोगों के घमंड को तोड़कर रख देगी ये ख़बर. ये सिर्फ़ ख़बर ही नहीं, बल्कि सभ्य समाज के ऊपर एक करारा तमाचा है. हरियाणा के सोनीपत में न सिर्फ़ दिल दहला देने वाली एक घटना सामने आई है, बल्कि ये घटना मानवता को शर्मसार करने वाली भी है. अभी निर्भया कांड की चौथी बरसी के महीने भी नही हुए होंगे कि समाज के वहशी-दरिंदे, हत्यारों ने एक बार फिर से उसी तरह की क्रूर घटना को अंजाम दिया है. अपनी बर्बरता और कायरता का परिचय देते हुए यहां एक बुज़ुर्ग महिला के प्राइवेट पार्ट में अज्ञात हमलावरों ने टॉयलेट क्लीनर की प्लास्टिक की बोतल डाल दी.

दरअसल, मामला सोनीपत के गांव भठगांव का है. 80 वर्षीय पीड़ित महिला का नाम मनोहरी देवी बताया जा रहा है. बीते बुधवार को मनोहरी देवी अपने घर में मृत अवस्था में मिली. लागातार ब्लीडिंग की वजह से उस बुज़ुर्ग महिला की मौत हो गई. पुलिस मामले की जांच कर रही है. हालांकि, प्रारंभिक जांच में पुलिस को बलात्कार के कोई सबूत नहीं मिले हैं.

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पीड़िता के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर्स का मानना है कि उन्होंने इस तरह का क्रूर और बर्बर कृत्य अपने जीवन में नहीं देखा. ये घटना उन्हें साल 2012 में हुए निर्भया कांड की याद दिलाती है, जहां चलती बस में उसका सामुहिक बलात्कार किया गया और उसकी योनि में लोहे की रॉड डालकर दरिंदों ने इंसानियत को तार-तार किया था.

पुलिस के मुताबिक, मृतका अपने छोटे बेटे जयभगवान के साथ रहती थी. जयभगवान ने पुलिस को बताया कि उसकी मां घटना वाली रात नीचे कमरे में सोई थी, जबकि वह घर की पहली मंजिल पर बने कमरे में सो रहा था. बुधवार सुबह जब वह नीचे आया तो कमरे में उसकी मां की निर्वस्त्र हालत में मृत पड़ी थी.

गौरतलब है कि पीड़िता का शव बुधवार सुबह अपने घर के ग्राउंड फ्लोर पर पूरी तरह से खून से लथ-पथ मिला. पीड़िता की बॉडी को सोनीपत सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टर्स ने पीड़िता के शरीर में एक बोतल पाया.

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डॉक्टरों का मानना है कि काफ़ी बुरी तरह से पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में बोतल डालने की वजह से रक्तस्राव के कारण ही उसकी मौत हुई है.

सोनीपत पुलिस स्टेशन के एसएचओ प्रहलाद सिंह ने कहा कि वे इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि हत्यारा कैसे इस पीड़िता के कमरे में घुसा? सबसे पहले जयभगवान ने अपनी मां की बॉडी को देखा था.

शव परीक्षण करने वाले मेडिकल बोर्ड के सदस्य Dr Sumit Kaushal ने कहा, मैंने जो देखा और जिस दर्द को महसूस किया है, उस पर आपको विश्वास भी नहीं होगा.
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सच कहूं तो ये एक ऐसी वीभत्स घटना है, जो हमारे असंवेदनशील समाज के उस स्याह पक्ष को उजागर करती है, जो आज हम सबके ऊपर हावी हो रहा है. उस पीड़िता ने जो दर्द सहा होगा, उसकी कल्पना मात्र से ही जब हमारी रूह कांप जाती है, तो क्या उस वहशी-दरिंदे की रूह नहीं कांपी होगी? आखिर क्या हो रहा है हमारे समाज को? जब हमारे समाज में इस तरह की बर्बर घटनाएं हो रही हैं, तो फिर हम किस आधार पर सभ्य समाज में होने का दंभ भरते हैं?

अफ़सोस कि अब हमारी यह नियती बन गई है कि हमारी आंखों के सामने ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, हम उस पर अपना शोक व्यक्त कर देते हैं और फिर कुछ दिन बाद भूल भी जाते हैं. लेकिन याद रखना, अगर हमारे समाज में ऐसी ही अमानवीय घटनाएं होती रहीं, तो वो दिन दूर नहीं जब आप और हम मुकदर्शक की तरह इंसानियत के जनाज़े को उठते हुए देख रहे होंगे.

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