शिक्षा की दृष्टि से उत्तर प्रदेश आज भी देश के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक है. कुल 35 राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों की साक्षरता दर की बात करें तो यूपी 67.7 की दर से 29वें नंबर पर है. इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यूपी में शिक्षा का स्तर क्या है.

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यूपी के सरकारी स्कूल हमेशा से ही शिक्षकों की कमी से जूझते पाए जाते हैं. जो शिक्षक हैं भी, उनमें से अधिकांश तो ऐसे हैं जिन्हें राज्य के मुख्यमंत्री और राज्यपाल का नाम तक नहीं पता, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शिक्षक के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके लिए शिक्षा ही सब कुछ है.

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84 वर्षीय श्री कृष्णनन शर्मा उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के रहने वाले हैं. साल 1995 में सेवानिवृत्ति के बाद भी वो पिछले 24 सालों से शाहजहांपुर के कैंट ब्लॉक के सरकारी जूनियर हाई स्कूल के बच्चों को बिना किसी वेतन के पढ़ा रहे हैं. शिक्षा के प्रति उनका ये समर्पण युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है.

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जिस उम्र में लोग घर पर बैठकर आराम कर रहे होते हैं, श्री कृष्णनन शर्मा हर दिन 8 किलोमीटर साइकिल चला कर स्कूल जाते हैं. शाहजहांपुर के मोहनपुर गांव निवासी कृष्णन शर्मा इस स्कूल में अंग्रेज़ी के टीचर हैं. वो अन्य शिक्षकों की तरह बच्चों को सभी पीरियड पढ़ाने के बाद ही घर लौटते हैं. वो एक दिन भी स्कूल जाना मिस नहीं करते.

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इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि 'मैंने सन 1958 में शिक्षक के तौर पर पढ़ाना शुरू किया था. 1995 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी मैंने बच्चों को पढ़ाना जारी रखा. मैं ऐसा सिर्फ़ इसलिए कर पाता हूं क्योंकि सभी छात्रों से मुझे बेहद प्यार और सहयोग मिलता है'.
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Child Rights and You (CRY) की रिपोर्ट के मुताबिक़, उत्तर-प्रदेश के सरकारी स्कूलों में आज भी करीब 2,24,329 शिक्षकों के पद खाली हैं.

शिक्षा के प्रति श्री कृष्णनन शर्मा का ये जज़्बा काबिल-ए-तारीफ़ है. वो देश के उन नायकों में से एक हैं, जिनके नेक कार्य समाज में बदलाव लाने में मदद करते हैं.

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