देश और विदेश में आपने महात्मा गांधी की कई प्रतिमाएं देखी होंगी. इन सभी का रंग भले ही अलग हो, लेकिन ये हूबहू उनकी फ़ोटोज की नकल नज़र आती हैं. इनमें से अधिकतर Statues को बनाने वाले मूर्तिकार का नाम है राम वी. सुतार, जो पिछले 7 दशकों से मूर्ती बनाने का काम कर रहे हैं. संसद भवन में गांधीजी की जिस प्रतिमा पर आए दिन सांसद धरना देते हैं, वो भी इन्होंने बनाई है. नमर्दा के किनारे Statue of Unity को भी सुतार ही बना रहे हैं. इनके मूर्तिकार बनने की कहानी भी काफ़ी दिलचस्प है.

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राम वी. सुतार बचपन में Statue of Liberty की फ़ोटो देख कर अभिभूत रह गए थे. तभी उन्होंने ठान लिया था कि एक दिन वो भी एक मूर्तिकार बनेंगे और इससे भी ऊंची प्रतिमा बनाएंगे. उनका ये सपना बहुत जल्द ही पूरा होने वाला है. सरदार सरोवर बांध पर देश के लौह पुरूष की प्रतिमा बहुत जल्द बनकर तैयार हो जाएगी. ये दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ती होगी, जिसकी ऊंचाई 182 मीटर होगी.

सुतार गर्व से इसके बारे में बात करते हुए कहते हैं- 'ये Statue of Liberty से लगभग दोगुनी बड़ी होगी.'

7 दशक से बना रहें हैं मूर्तियां

राम सुतार 7 दशकों से मूर्ती बना रहे हैं. अभी तक उन्होंने तकरीबन 8000 मूर्तियां बनाई हैं. इनमें महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, बी. आर. अंबेडकर, इंदिरा गांधी जैसी हस्तियों के नाम शामिल हैं. इनकी मूर्तियां न सिर्फ़ देश बल्कि विदेशों में भी लगाई गई हैं. विदेशों में लगी 350 गांधीजी की मूर्तियों को सुतार ने ही बनाया है और देश में हज़ारों.

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सुतार का जन्म 1925 में महाराष्ट्र के धूले ज़िले के एक छोटे गांव गुंडूर में हुआ था. उनके पिता एक लौहार थे, जो बैलगाड़ियां, तांगा और खेती के लिए काम आने वाले औज़ार बनाते थे. स्कूल में उन्होंने गांधी जी कि एक मूर्ती बनाई थी. युवा अवास्था तक आते-आते पूरे ज़िले में सुतार की पहचान एक अच्छे मूर्तीकार के रूप में होने लगी. इसके बाद उन्होंने 1952 में मुंबई के JJ School of Art से मूर्तिकला में डिप्लोमा हासिल किया और पुरातत्व विभाग(Archaeological Survey of India) के साथ काम करना शुरू कर दिया.

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अजंता-अलौरा की मूर्तियों की है मरमम्त

यहां उनका काम था खंडित हो चुकी अजंता-अलौरा की मूर्तियों की मरमम्त करना. 1959 में दिल्ली आ गए. यहां उन्होंने Directorate of Advertising and Visual Publicity (DAVP) में बतौर टेक्निकल असिस्टेंट काम किया. मगर कुछ दिनों बाद उन्होंने ये नौकरी छोड़ दी और अपने सपने को साकार करने में जुट गए.

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सुतार ने पहली मूर्ती 1966 में स्वतंत्रता सेनानी और नेता गोविंद बल्लभ पंत की बनाई थी. इसके लिए उन्होंने दिल्ली के साउथ एक्स. इलाके में किराए पर एक मकान लिया था. इस मूर्ती की ऊंचाई 10 फ़ीट थी, जो Bronze की बनी थी. इसे दिल्ली के कृषि भवन के सर्कल पर लगाया गया था.

इसके बाद सुतार के पास कई और हस्तियों की मूर्ती बनाने के ऑडर आने लगे. कमाई बढ़ी तो उन्होंने 1970 में दिल्ली के लक्ष्मीनगर में अपना खु़द का स्टूडियो खोला. इसे बाद में उन्होंने नोएडा शिफ़्ट कर दिया, जहां वो अपने बेटे अनिल सुतार के साथ मिलकर कई नामचीन लोगों के Statue बना चुके हैं.

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बनाना चाहते हैं गांधीजी की सबसे ऊंची प्रतिमा

उनका सपना है कि वो एक दिन महात्मा गांधी की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाएं क्योंकि वो शांति के सबसे बड़े दूत थे. फ़िलहाल वो Statue of Unity को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं. इसका डिज़ाइन नोएडा में ही तैयार किया गया है. हालांकि इसकी Bronze में ढलाई चीन में होगी.

शानदार Monumental Sculptor

इनके बारे में Texas यूनिवर्सिटी में Asian Art History की असिस्टेंट प्रोफ़ेसर Melia Belli Bose ने कहा- ‘वो एक शानदार Monumental Sculptor (मूर्तिकार) हैं. ये बताना मुश्किल है, पर वो मानव इतिहास के सबसे महान मूर्तिकार हैं, अगर नहीं भी तो वो 19वीं सदी के सबसे महान मूर्तिकार तो होंगे ही.’

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93 साल की उम्र में भी सुतार रोज़ नोएडा के अपने स्टूडियो में 11 बजे पहुंच जाते हैं. यहां अलग-अलग मूर्तियों के मिट्टी के मॉडल बनाते हुए वो 8 घंटे बिताते हैं. पिता-पुत्र मिलकर कम से कम 12 फ़ीट की मूर्तियां हर दिन बनाते हैं. उनके पास कई नामी-गिरामी हस्तियों की मूर्ती बनाने के ऑर्डर हैं.

पद्म भूषण से सम्मानित राम वी. सुतार उम्र के 9वें दशक में भी अपने काम को लेकर प्रतिबद्ध है. उनकी महानता इसी से साबित होती है.

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