सर्दियों में धूप सेंकती...

खाट पर बैठी अपने पोते या पोती की मालिश करती...

सुबह-सुबह ज़ोर-ज़ोर से मंत्रों का उच्चारण करतीं...

इसके अलावा पापा से बचाने के लिए झूठ-मूठ का डांटती...

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ऐसा करते अकसर आपने अपनी दादी और नानी को देखा होगा, जिनकी सुबह अपने रिश्तों से होती है रात भी उन्हीं रिश्तों के इंतज़ार में बीत जाती है. मगर एक दादी या नानी ऐसी भी हैं, जिन्होंने सभी दादी और नानी को अपनी ज़िंदगी को नए सिरे से और नई सोच के साथ जीने की राह दी है. वो हैं केरल की 96 वर्षीय Karthyayini Amma, उन्होंने साबित कर दिया कि अगर जज़्बा हो, तो कभी-भी कुछ भी किया जा सकता है.

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उनके इसे जज़्बे को सलाम करते हुए केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने उन्हें सम्मानित किया. ये सम्मान समारोह आज यानि गुरुवार 1 नवंबर को केरल के मुख्यमंत्री सेमिनार हॉल में आयोजित हुआ.

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ग़ौरतलब है कि, 96 वर्षीय Karthyayini Amma केरल के Alappuzha ज़िले की रहने वाली हैं. उन्होंने Kerala Literacy Mission's 'Akshara Laksham' (Million Letter) Programme के तहत की गई परीक्षा में 100 में से 98 अंक लाकर कभी न मिटने वाला इतिहास रचा था. इस परीक्षा को 42,933 परीक्षार्थियों ने उत्तीर्ण किया, जिनमें अम्मा उम्र में सबसे बड़ी थीं. इसी साहस और पढ़ाई की लगन को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया है.

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आपको बता दें कि Karthyayini Amma ने घरों में काम करके अपने 6 बच्चों को अकेले पाला है. उनको इस उम्र में पढ़ाई करने की प्रेरणा अपनी 60 साल की बेटी से मिली, जिन्होंने कुछ साल पहले 10वीं. की परीक्षा पास की है.

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Karthyayini Amma, हर उस शख़्स के लिए मिसाल हैं जिन्हें लगता है कि दूसरों से सीख लेना शान के ख़िलाफ़ होता है. साथ ही उनके लिए भी जो एक उम्र के बाद पढ़ाई करने से शर्मिंदा होते हैं. ये कहना ग़लत नहीं होगा कि उम्र से फ़र्क़ नहीं पड़ता, बस पढ़ाई करने या ज़िंदगी के किसी भी इम्तिहान को पास करने का जज़्बा होना चाहिए.

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