स्कूल जाते हुए बच्चों की तस्वीरें कुछ ऐसी दिखाई देती हैं.

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साल 2006 में सरकार बच्चों के बैग का वज़न कम करने के लिए एक कानून (THE CHILDREN SCHOOL BAGS (LIMITATION ON WEIGHT) BILL) भी लेकर आई थी, लेकिन फिर भी स्कूलों ने बच्चों के इस बोझ से छुटकारा दिलाने में कोई रूचि नहीं दिखाई. ऐसे लोगों को गुजरात के एक स्कूल से सबक लेना चाहिए. वहां के प्रिंसिपल ने प्राइमरी क्लास के बच्चों का वज़न को 5-6 किलो कि तुलना में 500-700 ग्राम कर दिया है.

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बच्चों को इस अनचाहे बोझ से छुटाकारा दिलाया है नवसारी ज़िले के भागड़ प्राथमिक विद्यालय के प्रिंसिपल आनंद कुमार ने. वो जब भी अपनी बेटी को स्कूल छोड़ने जाते थे, तब उनके मन में ये सवाल आता था कि इतने छोटे बच्चों के लिए इतना भारी स्कूल बैग क्यों?

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इससे उन्हें शारीरिक थकान तो होती ही होगी, मेंटल टॉर्चर अलग से सहना पड़ता होगा. इस सवाल को उन्होंने अपने कुछ साथी टीचर्स से साझा किया. सबने मिलकर इसका एक हल निकाला. इन्होंने प्राइमरी क्लास के बच्चों का पूरे साल का सिलेबस 10 किताबों में समेट दिया. हर एक किताब में एक महीने का सिलेबस है और लिखने के लिए खाली पेज भी.

अब उनके स्कूल के बच्चे सारे विषयों की टेक्सट बुक लाने की जगह एक ही किताब लेकर पढ़ने आते हैं. इस तरह बच्चों को ज़रूरी ज्ञान भी मिल रहा है और उन्हें भारी बैग भी नहीं उठाना पड़ता. उनके इस कदम को पेरेंट्स ने भी सराहा है. साथ ही स्कूल में बच्चों की संख्या 73 से बढ़कर 131 हो गई है. Gujarat Council Of Educational Research And Training (GCERT) के हाल ही में हुए सम्मेलन में इस आइडिया को शेयर किया गया था.

GCERT के डायरेक्टर टी.एस. जोशी ने इसकी तारीफ़ करते हुए टाइम्स ऑफ़ इंडिया से कहा, 'इस तरह का आइडिया देश के दूसरे हिस्से में कहीं देखने को नहीं मिला है, इससे बच्चों को बहुत राहत मिलेगी. उन्होंने पूरे राज्य में इस आइडिया को कंडक्ट करने का आदेश दिया है.'

है न अच्छी पहल, क्यों न इसे पूरे देश में लागू किया जाए?