इस दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जिनके संघर्ष की कहानी दूसरों को प्रेरित करती है. आज हम ऐसे ही पिता की प्रेरणादायक कहानी शेयर करने जा रहे हैं, जिसने अपने बच्चों की ख़ुशियों के आगे अपनी परेशानियों को ज़ाहिर तक नहीं होने दिया.

Source: parhlo.com

लाहौर के सलीम काज़मी ने अपने फ़ेसबुक पेज पर एक ट्रिप के दौरान किसी कुली के साथ हुई छोटी सी मुलाकात का किस्सा शेयर किया है-

सलीम लिखते हैं कि 'कल रात लाहौर रेलवे स्टेशन पर 10 मिनट के लिए मेरी मुलाक़ात यूसिफ़ नाम के एक कुली से हुई. वो यहां पर 20 सालों से काम कर रहे थे. जब उनके बच्चे पढ़ लिख लिए, तो यूसिफ़ ने कुली की नौकरी छोड़ दी'.

सलीम काज़मी ने आगे लिखा है कि, साल 2008 में यूसिफ़ के बेटे ने जिस यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की थी, उसे वहीं पर लेक्चरार की जॉब मिल गयी थी. बेटे की नौकरी लगने से पूरा परिवार ख़ुश था, लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंज़ूर था. इसी साल यूसिफ़ ने एक रोड एक्सीडेंट में अपने इकलौते बेटे को खो दिया.

जवान और इकलौते बेटे की मौत से पूरा परिवार बिखर चुका था. यूसिफ़ ने जैसे तैसे अपने परिवार को संभाला, लेकिन जिस बेटे की आस में उन्होंने कुली की नौकरी छोड़ दी थी अब उसे दोबारा करने के अलावा उनके पास दूसरा और कोई रास्ता नहीं था.

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2008 में ही यूसिफ़ परिवार का भरण-पोषण के लिए लाहौर रेलवे स्टेशन पर कुली की नौकरी पर वापस लौट आये. तब से लेकर अब तक वो इस उम्र में भी कुली का काम करने को मजबूर हैं. एक कंधा पैरालाइज़ हो चुका है, बोझ उठाते वक़्त हाथ कांपने लगते हैं. बावज़ूद इसके यूसिफ़ अपनी दोनों बेटियों को क़ाबिल बनाने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं.

सलाम है ऐसे इंसान को!

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