रूस के पश्चिम में एक शहर है Kursk(कुर्स्क). ये वो जगह है, जहां द्वितीय विश्वयुद्ध में हिटलर की सेना हार गई थी. यहीं दुनिया की सबसे बड़ी टैंक वॉर भी हुई थी. पर आज हम आपको इसके इतिहास के बारे में नहीं, बल्कि इसके विधायक के बारे में बताएंगे. रूस की रूलिंग पार्टी युनाइटेड रशिया से ताल्लुक रखने वाले अभय सिंह का बिहार से बड़ा गहरा नाता है.

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अभय सिंह इसी साल हुए चुनाव में Kursk शहर से Deputat चुने गए हैं. वहां पर Deputat को एक विधायक का दर्जा दिया जाता है. वो एक डॉक्टर और सक्सेसफु़ल बिजनेसमैन हैं. अभय सिंह मूल रूप से पटना के रहने वाले हैं, वो 90 के दशक में कुर्स्क मेडिकल की पढ़ाई करने गए थे. अभय Kursk State Medical University से ग्रैजुएशन करने बाद पटना आए थे.

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पटना में उन्होंने बतौर डॉक्टर कुछ दिनों तक प्रैक्टिस भी की, पर बात नहीं बनी और वो कुर्स्क लौट गए. यहां अभय ने एक फार्मा कंपनी खोली. किस्मत ने साथ दिया और उनका ये बिज़नेस चल पड़ा. हालांकि, इस दौरान उन्होंने उन सभी मुश्किलों का सामना किया, जो एक विदेशी को रूस में अपना बिज़नेस शुरू करने में आती हैं.

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व्यापार में काफ़ी मुनाफ़ा हुआ तो उन्होंने रियल इस्टेट में हाथ आज़माया और धीरे-धीरे समाजिक कार्यों में भी रुचि लेनी शुरू कर दी. रियल इस्टेट के बिज़नेस ने उन्हें काफ़ी मज़बूत बनाया और वो रूस के कई ताकतवर नेताओं के दोस्त बन गए. उनके काम की चर्चा पूरे देश में होने लगी और इस तरह अभय को चुनाव लड़ने का मौका भी मिला.

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आपको जानकर हैरानी होगी कि कुर्स्क शहर में उनका ख़ुद का मॉल है, जिसका उद्घाटन रूस में भारत के राजदूत अजय मल्होत्रा ने किया था. मगर रूस के रंग में रंग जाने के बाद भी अभय सिंह अपने देश और संस्कृति को भूले नहीं हैं. 2015 में अभय ने इंटरनेशल योगा डे पर कुर्स्क में पहले योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया था.

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इससे एक बात तो तय है कि हम भारतीय कहीं भी चले जाएं देश का नाम रौशन करने में कोई कसर नहीं छोड़ते. है के नहीं? 

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