कुछ दिनों पहले ही एक ख़बर आई थी कि मेरठ में कुछ प्रशंसक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भव्य मंदिर का निर्मण करवा रहे हैं. ऐसा पहली बार नहीं है कि जब प्रशंसक किसी व्यक्ति विशेष का मंदिर बनवा रहे हों. इससे पहले भी दक्षिण भारत में रजनीकांत के मंदिर के बारे में सुन चुके हैं.

ऐसा ही एक मंदिर कोलकाता में देखने को मिला है, जहां एक व्यक्ति ने अपने घर के गराज को करीब 16 साल अमिताभ बच्चन के मंदिर में बदल दिया है. इंडिया टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, अगस्त्य नाम का एक स्टूडेंट स्कूल में दिन भर अमिताभ बच्चन के बारे में बातें किया करता था, जिससे परेशान हो कर टीचर्स ने अगस्त्य के पिता संजय पाटोदिया को स्कूल में बुलाया और अगस्त्य के बारे में बताया. संजय को स्कूल वालों की इस शिकायत का पता चला, तो वो काफ़ी मुस्कुराये क्योंकि वो खुद भी अमिताभ बच्चन के बहुत बड़े फ़ैन हैं

संजय ने ही अपने गराज में अमिताभ बच्चन का मंदिर बनवाया था. सुबह-शाम संजय इस मंदिर में पूजा भी करते हैं, जिसमें वो अमिताभ आरती और अमिताभ चालीसा का पाठ भी करते हैं. इसके अलावा अजय अपने गले में थाईलैंड में बनवाया हुआ अमिताभ बच्चन का एक 17 ग्राम का गोल्ड पेंडंट भी पहनते हैं. संजय ऑल बंगाल अमिताभ बच्चन फैंस एसोसिएशन (ABABF) के सेक्रेटरी भी हैं. ये एसोसिएशन 11 अक्टूबर अमिताभ बच्चन के 75वें जन्मदिन के मौके पर एक प्रतियोगिता भी करवाने जा रही है, जिसमें 5 से 11 साल के बच्चे हिस्सा लेंगे. इन सभी बच्चों को अमिताभ बच्चन टी-शर्ट्स भी दी जाएंगी.

संजय के भाई और अमिताभ बच्चन फैंस एसोसिएशन से जुड़े विजय कुमार पाटोदिया का कहना है कि 'हमने सुना है कि बच्चन साहब अपने कपड़ों को गूंज नाम के एक NGO को दान करने जा रहे हैं. इन कपड़ों का इस्तेमाल सेनेटरी नैपकिन बनाने के लिए किया जायेगा, जिसे बाद में ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के बीच बांटा जायेगा. उनके जन्मदिन के मौके पर हम भी इस मुहीम में शामिल होंगे और कपड़ों को दान करेंगे.'

संजय के मुताबिक, 'दो दशकों में दुर्घटना की वजह से ऐसा सिर्फ़ 3 बार ही हुआ है, जब अमिताभ बच्चन का जन्मदिन कोलकाता और उनके घर 'जलसा' में इस तरह नहीं मनाया गया.' संजय के हाथ पर अमिताभ बच्चन का टैटू भी बना हुआ है, जिसमें अमिताभ उनके साइन की तरह जबकि बच्चन उनके पिता की स्टाइल में लिखा हुआ है.

बुधवार को अमिताभ बच्चन के जन्मदिन के मौके पर यहां एक खास प्रार्थना सभा रखी गयी है, जिसमें पुजारी यहां अमिताभ चालीसा और आरती का पाठ करेंगे. इस चालीसा के बोल कुछ ऐसे हैं:

'हे हरिवंश ज्ञान गुण सागर/आपसे हुए एक अवतार उजागर/ हरिपुत्र अतुलित बलधामा/ तेजीपुत्र अमिताभ है नामा.'

इस चालीसा को किताब के रूप में भी छपवाया गया है, जिसे पूजा की थाली में सजाकर दिन में दो बार अमिताभ मंदिर में आरती की जाती है. आरती करते वक़्त प्रसाद और फूलों का इस्तेमाल नहीं किया जाता. इस बारे में संजय का कहना है कि 'हे ईश्वर हमें माफ़ करना, क्योंकि हम आपसे ज़्यादा अमिताभ जी को पूजनीय मानते हैं.'

पिछले साल तक ये आरती 'तूफ़ान' और 'अग्निपथ' फ़िल्म में अमिताभ बच्चन द्वारा पहने गए जूतों के सामने होती थी, जिसकी जगह अब 'सरकार' फ़िल्म के सुभाष नगारे वाले लुक की प्रतिमा ने ले ली है. इसके साथ ही मंदिर की दीवारों पर 'जय श्री अमिताभ' और 'हर हर अमिताभ' के स्लोगन लिखे हुए हैं. मंदिर के साथ ही बने हुए सीटिंग एरिया में प्लास्टिक के दो सोफे, एक अलमारी और चार कांच के बक्से लगाए गए हैं, जिनमें अमिताभ बच्चन द्वारा इस्तेमाल की चीज़ों को संभाल कर रखा गया है. इनमें कौन बनेगा करोड़पति के दौरान पहनी गई दो जैकेट, एक चश्मा और उनकी फ़िल्मों के यादगार पोस्टर्स को जगह दी गई है.