घंटों के सफ़र का मिनटों में निपटारा', ये शायद आगे आने वाले समय में कोरी कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत होने जा रहा है. अमेरिका की हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी (HTT) ने हाल ही में आंध्र प्रदेश सरकार के साथ एक MOU पर हस्ताक्षर किए हैं. इसका मकसद भारत में हाइपरलूप सिस्टम की शुरूआत करना है.

भारत में हाइपरलूप को लेकर पहला ऐसा आधिकारिक एग्रीमेंट है. इसके लिए एक पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा. एचटीटी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से करीब 2500 नौकरियां मिलेंगी. हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन को Elon Musk जैसी हस्तियों का भी समर्थन प्राप्त है. लेकिन इस तकनीक को अब तक दुनिया के किसी भी देश में इस्तेमाल नहीं किया गया है.

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स्विटज़रलैंड में विश्व इकोनॉमिक फोरम में आंध्रप्रदेश सीएम एन चंद्रबाबू नायडु ने HTT के अधिकारियों से मुलाकात की थी. जनवरी में हुई इस मुलाक़ात के बाद हाल ही में इस सिलसिले में एक बार फिर मुलाक़ात हुई और आंध्र प्रदेश इकोनॉमिक डेवलेपमेंट बोर्ड और एचटीटी ने MOU पर हस्ताक्षर किए. हाइपरलूप को विजयवाड़ा और अमरावती जैसे शहरों के बीच लाए जाने की तैयारी है. माना जा रहा है कि इस तकनीक के आ जाने के बाद से 35 किलोमीटर का सफ़र यानि सवा घंटे के सफ़र को महज पांच मिनट में पूरा किया जा सकेगा.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्टूबर से इस क्षेत्र की जांच का कार्य शुरू हो जाएगा. इसके बाद अप्रैल 2018 से कंपनी अपना काम शुरू कर सकती है. आंध्र प्रदेश इकोनॉमिक डेवलेपमेंट बोर्ड ने एचटीटी को पहले फ़ेस के लिए पार्टनर बनाया है. इसके अलावा भी कई और कंपनियां इस प्रोजेक्ट के साथ जुड़ सकती हैं.

Hyperloop One नाम के एक और कॉरपोरेशन ने भी भारत में हाई स्पीड ट्रांसपोर्टेशन को लेकर अपनी दिलचस्पी जाहिर की है. इस कंपनी का दावा है कि अगर उन्हें इस प्रोजेक्ट का दायित्व मिलता है, तो दिल्ली से मुंबई के रूट को महज 80 मिनटों में संभव बनाया जा सकता है.

अगर सरकार इन प्रोजेक्ट्स की दिशा में गंभीरता से काम ले तो देश की इकोनॉमी को ज़बरदस्त फ़ायदा पहुंचाया जा सकता है, हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर कुछ सालों का इंतज़ार करना ही होगा.

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