अगर आपने आमिर खान और अजय देवगन की कॉमेडी फ़िल्म 'इश्क' देखी होगी, तो आपको याद होगा कि एक दृश्य में एक बंदर दो ट्रकों के बीच अद्भुत तरीके से अपनी गाड़ी निकाल कर अजय और आमिर की जान बचा लेता है. खैर, ये तो रील लाइफ़ थी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज से दशकों पहले 18वीं शताब्दी में भी एक लंगूर अपने कारनामों के लिए मशहूर था? ये भले ही गाड़ी ड्राइव न करता हो, लेकिन एक रेलवे स्टेशन पर अपने ग़ज़ब योगदान के लिए इसे आज भी याद किया जाता है.

1877 में जेम्स वाइड नाम के एक रेलवे कर्मचारी ने एक दुर्घटना में अपने दोनों पैर गंवा दिए थे. इस एक्सीडेंट से उबरने के बाद उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के Uitenhage स्टेशन पर सिग्नेलमैन के तौर पर नौकरी शुरु की. नौकरी के चार साल बाद जेम्स की नज़र Chacma प्रजाति के एक लंगूर जैक पर पड़ी. डार्क ग्रे रंग के ये लंगूर दक्षिण अफ़्रीका के कई हिस्सों में पाए जाते हैं. वहां जैक बैलगाड़ी खींचने का काम कर रहा था. जेम्स की नज़र इस लंगूर पर पड़ी और उसने उसे फ़ौरन ख़रीद लिया.

शुरुआत में जेम्स ने जैक को ट्रॉली खींचने की ट्रेनिंग दी. जेम्स को जल्दी ही अंदाज़ा हो गया कि जैक उसकी उम्मीदों से ज़्यादा स्मार्ट है और वो कई काम कर सकता है. जेम्स ने जल्द ही उसे कोल यार्ड की चाभियां संभालने का काम दे दिया. इसके अलावा स्टेशन के बगीचे की ज़िम्मेदारी भी जैक के कंधों पर ही थी.

एक बार जब जेम्स को यकीन हो गया कि जैक लीवर्स को ऑपरेट कर सकता है, तो उसे स्विच के बारे में भी ट्रेनिंग दी गई और बताया गया कि स्टेशन पर किसी भी ट्रेन के आने पर कैसे इन स्विच को अपनी पॉज़िशन पर लगाया जाता है.

जेम्स, जैक को इशारा करने के लिए केवल एक या दो उंगलियों का ही इस्तेमाल किया करते था. इशारा मिलते ही जैक सही लीवर दबा देता और इसके बाद इस होशियार लंगूर को किसी भी तरह के निर्देशों की जरूरत नहीं पड़ती. यूं तो जैक हमेशा अपने मालिक की निगरानी में ही रहता था, लेकिन ये किसी उपलब्धि से कम नहीं है कि इस लंगूर ने अपने करियर के दौरान एक बार भी ग़लती नहीं की थी.

जैक दरअसल चीज़ों को तेजी से सीखने की क्षमता रखता था. जैक अपने मालिक जेम्स के घर का भी ख्याल रखता था. वह कुएं से पानी भर लेता था, घर साफ़ कर देता था, यहां तक की पूरे बाग की भी देखभाल करता था.

जैक जल्दी ही रेलवे स्टेशन पर काफ़ी लोकप्रिय हो गया. लोग अक्सर इस सिग्नल ऑपरेटर के काम को देखकर हैरान हो जाते. लेकिन जब एक महिला ने रेलवे प्रशासन को इस बारे में सूचित किया तो जैक और जेम्स दोनों को नौकरी से निकाल दिया गया.

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जेम्स ने इस फैसले को चुनौती दी जिसके बाद एक सिस्टम मैनेजर ने जैक की क्षमताओं को परखते हुए उसे जॉब के लिए फ़िट घोषित किया था. जेम्स को अपनी नौकरी वापस मिल गई और जैक को भी दोबारा नौकरी पर रख लिया गया. इसी के साथ जैक दुनिया का पहला ऐसा लंगूर था, जो रेलवे के लिए काम कर रहा था. इस घटना के बाद से ही इस बंदर को 'जैक द सिग्नलमैन' कहा जाने लगा.

रेलवे प्रशासन के हर सदस्य को मालूम था कि जेम्स का एक अस्सिटेंट भी है पर कुछ ही लोग जानते थे कि ये अस्स्टिेंट इंसान न होकर एक बंदर है. जैक, जेम्स के साथ करीब नौ सालों तक रहा. इस दौरान उसने रेलरोड पर काम करने के दौरान कभी गलती नहीं की. 1890 में जैक की टीबी की वजह से मौत हो गई. जेम्स अपने दोस्त के चले जाने से काफ़ी समय तक सदमे में रहे थे.

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