हमने कई बार बड़े-बुजुर्गों से सुना है कि दुनिया में चमत्कार होते हैं. ऐसा ही एक चमत्कार हुआ है राजस्थान के उदयपुर शहर में. जिस बच्चे का अभी नामकरण भी नहीं हुआ है, जिसका जन्म प्रेग्नेंसी के 28वें हफ्तेवें  में ही हो गया और जिसका वज़न मात्र 470 ग्राम यानी कि 1lb है, हाल ही में उसकी सफ़ल ओपन हार्ट सर्जरी हुई है.

वो इतना नाज़ुक है कि उसको छूना भी मुश्किल है, उसने अभी तक अपनी आंखें भी नहीं खोली हैं, उसके फेंफड़े भी अभी तक विकसित नहीं हुए हैं. उसकी त्वचा ऐसी दिखती है, मानो Parchment Paper (चर्मपत्र) से बनी हुई हो. राजस्थान के गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल और जीवंता हॉस्पिटल के डॉक्टर्स की एक टीम ने इस बेहद मुश्किल और ख़तरनाक सर्जरी को अंजाम दिया है. इस सर्जरी में डॉक्टर्स ने उसकी Aorta (बड़ी धमनी) और Pulmonary Artery (फेंफड़े की धमनी) को अलग किया है. सर्जरी के जरिये डॉक्टर्स ने दिल की इन दो प्रमुख रक्त वाहिकाओं को अलग किया, जो एक साथ फंसी हुई थीं.

यह सर्जरी दुनिया में अब तक के सबसे कम उम्र वाले नवजात की है और इस सर्जरी की सफलता ने चिकित्सा विज्ञान में नए रिकॉर्ड दर्ज किए हैं.

बच्चे की सर्जरी करने वाले कार्डियक वेसक्यूलर एवं थोरेसिक सर्जन डॉ. संजय गांधी ने बताया, इस नवजात शिशु को दिल से जुड़ी गंभीर बीमारी थी. इस बीमारी में इस बच्चे के हृदय से निकलने वाली दो मुख्य धमनियां आपस में जुड़ी हुई थी. हाथ की हथेली पर समा जाने वाले इस नवजात को बचाने के लिए ऑपरेशन करना जरूरी हो गया, लेकिन इस सर्जरी की जटिलता भी कम नहीं थी. इसके साथ ही डॉ. गांधी ने बताया कि ऑपरेशन के बाद अब ये बच्चा दूसरे बच्चों की तरह की खेल-कूद, दौड़-भाग कर सकेगा. बच्चे की देखभाल करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि सर्जरी एक कठिन काम था, क्योंकि शरीर के लगभग सभी अंग बहुत कमजोर थे. हाथ की हथेली पर समा जाने वाले इस नवजात का जन्म के समय वज़न केवल 470 ग्राम था.

Chief Neonatologist and Paediatric Intensivist, डॉक्टर सुनील जांगिड ने कहा, आमतौर पर धमनियों के बीच का संबंध तब तक रहता है जब भ्रूण मां के गर्भ में रहता है. जो खुद-ब-खुद प्रसव के बाद टूट जाता है और अगर ऐसा नहीं होता है, तो इसका इलाज दवाओं के साथ किया जाता है. लेकिन इस बच्चे के मामले में जब उसने दवाओं के बाद की कोई इम्प्रूवमेंट नहीं दिखाया, तो फिर आख़िरी ऑप्शन केवल ओपन हार्ट सर्जरी का ही बचा था.

ये बच्चा इतना छोटा था कि डॉक्टर्स ने फ़ैसला किया कि इसकी सर्जरी Nicu (neonatal Intensive Care Unit) में करना ही सही होगा. इस जटिल सर्जरी में जो सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट यूज़ किये गए थे, वो बहुत ही छोटे थे. सबको बस यही चिंता थी कि क्या ऑपरेशन के बाद वो ज़िंदा बचेगा या नहीं. क्या वो ये सब झेल पायेगा.

उदयपुर में रहने वाले एस.पी. जैन की पत्नी ने IVF तकनीक की मदद से इस बच्चे को जन्म दिया था. ये बच्चा प्रीमैच्योर था, इसका जन्म प्रेगनेंसी के 5.5 महीने में ही हो गया था. नवजात के पेरेंट्स ने अभी तक बच्चे का नाम भी नहीं सोचा है. उनके लिए बच्चे का बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है. बच्चे के पिता कहते हैं, 'हमारा बच्चा बहुत बहादुर है तभी तो इतना कम वजन होने के बावजूद इन विषम परिस्थितियों को झेल पाया. ये हमारी प्रार्थनाओं का ही फल है.'