आजकल बॉलीवुड में बहुत ही कम ऐसी फ़िल्मे आती हैं, जिसकी ऑडियंस हर क्लास, हर उम्र की होती है. एक ऐसी फ़िल्म जिसमें कॉमेडी हो, जो लोगों को इमोश्नल करे, जिसमें लव स्टोरी हो और एक्शन हो. इन सबका पैकेज एक फ़िल्म में आजकल कम ही मिल पाता है लेकिन 'बधाई हो' में ये सब है.

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वैसे तो फ़िल्म में सब कुछ बहुत अच्छा है लेकिन ये वो 5 सॉलिड वजहें हैं जो 'बधाई हो' देखने के लिए काफ़ी हैं:

1- हंसाती रहेगी फ़िल्म

अगर आप बहुत दिनों से ऐसी फ़िल्म का इंतजार कर रहे हैं, जो आपको हंसा-हंसा कर आपके पेट में दर्द कर दे, तो ये फ़िल्म आपके लिए है. फ़िल्म में कई ऐसे डायलॉग, कई ऐसे सीन हैं, जो आपको ROFL और LOL कर देंगे.

2- रूलाएगी भी फ़िल्म

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बहुत कम ही फ़िल्में ऐसी होती हैं, जो आपको एक पल हंसा रही हों, तो दूसरे पल इमोश्नल भी करती हैं. 'बधाई हो' फ़िल्म ऐसी है कि जब आप हॉल से बाहर निकल रहे होंगे, तो आपकी आंखों में नमीं भा होगी.

3- शानदार एक्टिंग

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ये किसी एक एक्टर की फ़िल्म नहीं है. इस फ़िल्म में सभी एक्टर्स का बराबर का रोल है. चाहे वो आयुष्मान खुराना हो, या पिता के किरदार में गजराज राव, या फिर मां के किरदार में नीना गुप्ता सबने बहुत अच्छी एक्टिंग की है. वहीं दादी के रोल में सुरेखा सीकरी ने भी शानदार एक्टिंग की है. फ़िल्म में आयुष्मान खुराना के छोटे भाई के डायलॉग डिलीवरी भी सबसे ज़्यादा हंसाती है.

4- अलग कॉन्सेप्ट

इस फ़िल्म का कॉन्सेप्ट बाकी फ़िल्मों से बिल्कुल अलग है. जैस कि ट्रेलर से ही पता चल जाता है कि दादी-दादा बनने की उम्र में गजराज और नीना मां बाप बन की तैयारी कर रहे हैं. जो कि आज भी इंडिया में एक Abnormal बात है.

5- कमाल का स्क्रीनप्ले

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राइटर अक्षत घिल्डियाल और शांतनु श्रीवास्तव ने कमाल के डायलॉग और स्क्रीनप्ले लिखा है. फिल्म के मज़ेदार डायलॉग्स और फ़नी सीन्स आपको पेट पकड़कर हंसने पर मजबूर कर देते हैं. फ़िल्म में दिल्ली, यूपी और हरियाणा की बोली का परफे़क्ट मिक्सचर है.

बधाई हो एक फैमिली फ़िल्म है, तो दशहरे की छुट्टी का फ़ायदा उठाइए और फ़िल्म देख आइए.