पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और पूर्व राष्ट्रपति, आसिफ़ अली ज़रदारी की बेटी बख़्तावर भुट्टो-ज़रदारी ने एहतराम-ए-रमज़ान कानून पर अपने सिलेसिलेवार ट्वीट्स में तीखी आलोचना की है.

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रमज़ान में सार्वजनिक रूप से खाने-पीने पर तीन महीने की सज़ा पर भुट्टो ने विरोध जताया है. उन्होंने बच्चों और बुजु़र्गों को रमज़ान पर रोज़ा न करने वालों को गिरफ़्तार करने वाले फ़ैसले को अमानवीय बताया.

भुट्टो ने मलाला के स्कूल में आतंकी हमले का ज़िक्र करते हुए कहा कि 'यहां स्कूलों में बच्चियों पर आतंकी हमला होता है और आतंकी खुलेआम मुस्कुराते हुए घूमते हैं, लेकिन रमज़ान के दिन अगर कोई पानी पी ले तो उसे तीन महीने के लिए जेल की सज़ा हो जाती है'.

बख़्तावर भुट्टो ने आगे कहा कि 'रोज़ा रखना इस्लाम के पांच बुनियादी सिद्धांतों में से एक है. ये बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसमें ये नहीं है कि आप रोज़ा नहीं रखने वालों को गिरफ़्तार कर उन्हें जेल भेज देंगे. ये इस्लाम में कहीं नहीं लिखा है'.

गौरतलब है कि पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह ज़िया-उल-हक़ द्वारा 1981 में लागू किए गए इस कानून को हाल ही में बदला गया है. नए कानून के अनुसार, रमज़ान में सार्वजनिक रूप से खाने-पीने पर तीन महीने जेल तक की सज़ा हो सकती है. इसके अलावा रमज़ान के दौरान खुलेआम नशा करने या खाने-पीने पर 500 पाकिस्तानी रुपये जुर्माना और जेल की सज़ा का प्रावधान है.

नए कानून में रमज़ान के दौरान इस कानून को तोड़ने वाले होटलों और रेस्तरां पर जुर्माना 500 रुपये से बढ़ा कर 25 हज़ार रुपये कर दिया गया है. इसके अलावा, कानून तोड़ने वाले टीवी चैनलों और सिनेमा हॉलों पर 50 हज़ार रुपये या उससे भी अधिक जुर्माना लगाया जा सकता है.

Source: TheQuint