महाराष्ट्र में स्थित पिंपरी-चिंचवाड के लोगों को जल्दी ही एक नई अनूठी किस्म की साइकिल मिलने जा रही है. ये साइकिल प्लास्टिक से नहीं, बल्कि बांस से बनी होगी. हल्की और मज़बूत इस साइकिल का वज़न महज 2 किलोग्राम होगा.

Bamboo इंडिया के फ़ाउंडर योगेश शिंदे ने कहा कि प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल से पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंच रहा है, ऐसे में हम एक ऐसी तकनीक को अपनाना चाहते थे जिससे पर्यावरण का कम से कम नुकसान हो. मुझे उम्मीद है कि ये साइकिल्स पिंपी-चिंचवाड म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की 'रेंट ए साइकिल' स्कीम का हिस्सा बनने में कामयाब होगी.

बांस की इस साइकिल की कीमत 35000 है और इस साइकिल का ऑनलाइन बेस पूरे भारत में 9000 से थोड़ा ज़्यादा है. वहीं हॉलैंड, अमेरिका और यूरोप में भी ये साइकिल काफी लोकप्रिय हो रही है.

शिंदे ने कहा कि 'हम अपने प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन बेचते हैं और हर महीने 4-5 भारतीय इन साइकिल्स को खरीद रहे हैं वहीं 10-15 साइकिल दुनिया के कई हिस्सों में एक्सपोर्ट की जा रही हैं. हाल ही में हमने 102 ऑर्गेनिक स्टोर्स के साथ टाईअप किया है, यहां इन बांस की साइकिल्स को सेल पर रखा जाएगा.'

इन साइकिल्स को वेल्हे तालुका में रहने वाले 10 किसान परिवारों के सदस्यों ने बनाया है. पुणे से 55 किलोमीटर दूर ये लोग बांस की खेती करते हैं. उन्होंने कहा कि हम बांस से जुड़े प्रोडक्ट्स और कच्चा माल भी इन्हीं परिवारों से लेते हैं, इन परिवारों को साइकिल को साथ जोड़ने का प्रशिक्षण हासिल है. ये साइकिल, मज़बूत, वॉटर रेस्सिटेंट और हल्की होती है. इसके अलावा ग्राहकों को अपनी साइकिल को कस्टमाइज़ करने का विकल्प भी मिलता है. ये साइकिल गियर और नॉन गियर दोनों ही फ़ॉर्म में मौजूद हैं.

शिंदे का फ़्यूचर प्लान सहयाद्रि रेंज से बांस की सहज उपलब्धता और अपनी कंपनी के साथ कम से कम 100 नए खेती के परिवारों को अपने मैन्युफ़ैक्चरिंग सेटअप के साथ जोड़ना है. ये कंपनी फ़िलहाल Dendrocalamus Strictus नाम की बांस की प्रजाति का इस्तेमाल साइकिल को बनाने में कर रही है. बांस की 136 Species होती हैं और कंपनी साइकिल्स को नई Species के साथ भी प्रयोग करना चाहती हैं. इसके अलावा साइकिल के वज़न को 1.8 किलोग्राम तक ले जाने का भी टारगेट रखा गया है.

Source: Indian Express