अपनी बेबाक़ छवि के लिए मशहूर पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी को 70 के दशक में स्पिन का जादूगर माना जाता था. बेदी को स्पिन के हर विभाग में महारत हासिल थी. यही कारण था कि वो न सिर्फ़ भारत बल्कि विदेशी पिचों पर भी कमाल की गेंदबाज़ी किया करते थे. वो भारत के पहले गेंदबाज़ थे जिन्होंने विदेशी धरती पर अपनी गेंदबाज़ी का लोहा मनवाया.

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बेदी की लाजवाब गेंदबाज़ी के आगे दुनिया का अच्छे सा अच्छा बल्लेबाज़ भी घुटने टेक दिया करता था. अपनी फ़िरकी गेंदबाज़ी के कारण वो हर विकेट पर बल्लेबाज़ की नाक में दम कर दिया करते थे. ख़ासकर गेंद को फ़्लाइट कराने की कला में उनको महारत हासिल थी. बेदी बेहद संतुलित और Rhythm के साथ गेंदबाज़ी करते थे.

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बेदी जब मात्र 15 साल के थे, तब उन्होंने पंजाब की तरफ़ से घरेलु क्रिकेट की शुरुआत की. इसके कुछ साल बाद वो दिल्ली से क्रिकेट खेलने लगे. घरेलु क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद बेदी को 31 दिसंबर, 1966 को टीम इंडिया से खेलने का मौक़ा मिला. इस दौरान उन्होंने भारत के लिए शानदार क्रिकेट खेली और जल्द ही वो टीम इंडिया के अहम सदस्य बन गए.

बेदी का शानदार प्रदर्शन

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साल 1969-70 में ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत दौरे पर आई थी. इस दौरान कोलकाता में खेले गए टेस्ट मैच में बेदी ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए 98 रन देकर 7 विकेट झटके. 3 मैचों की इस सीरीज़ में उन्होंने कुल 21 विकेट्स झटके थे. जबकि साल 1978-79 ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पर्थ में खेले गए एक टेस्ट मैच में उन्होंने 194 रन देकर 10 विकेट झटके थे. इस सीरीज़ में उन्होंने कुल 31 विकेट्स लिए थे.

कठिन समय में मिली कप्तानी

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साल 1976 में बेदी को भारतीय टीम का कप्तान नियुक्त किया गया. उनकी कप्तानी में भारत पहली बार वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ पोर्ट-ऑफ-स्पेन में टेस्ट मैच जीता. इस सीरीज़ के बाद भारत ने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ 2-0 से जीती. बेदी 22 टेस्ट मैचों में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे. इनमें से भारत सिर्फ़ 6 टेस्ट मैच ही जीत पाया, जबकि 11 में उसे हार का सामना करना पड़ा.

करियर

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बेदी ने भारत के लिए 67 टेस्ट मैचों में 266 विकेट झटके थे. उन्होंने भारत के लिए मात्र 10 वनडे मैच ही खेले जिसमें उन्होंने 7 विकेट लिए. 30 अगस्त 1979 को उन्होंने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपना आख़िरी टेस्ट मैच खेला.

बेदी के अज़ब-गज़ब रिकॉर्ड

जिस दौर में वनडे क्रिकेट 60 ओवर का खेला जाता था, उस समय बेदी ने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसे कोई भी गेंदबाज़ तोड़ नहीं पायेगा. दरअसल उन्होंने अपने 12 ओवर के स्पेल में 8 ओवर मेडन और मात्र 6 रन देकर 1 विकेट लिया था. ये था वो मैजिकल स्पेल (12-8-6-1).

लांस गिब्स के बाद बेदी दूसरे ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके नाम प्रत्येक टेस्ट मैच के हिसाब से सबसे ज्यादा मेडन ओवर फेंकने का रिकॉर्ड है. उन्होंने 4.2 मेडन ओवर प्रति विकेट लिया है.

बेदी घरेलु क्रिकेट में सर्वाधिक 1560 विकेट लेने वाले एकमात्र भारतीय गेंदबाज़.

विवाद

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कप्तान के तौर पर कई बार विवादों का हिस्सा भी रहे. साल 1976 में वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ एक टेस्ट मैच के दौरान जब वेस्ट इंडीज़ ने लगातार चार घातक तेज गेंदबाज़ों से गेंदबाज़ी कराई तो बेदी ने इस पर आपत्ति जताई. इस दौरान बल्लेबाज़ी करते समय जब टीम इंडिया के दो खिलाड़ी चोट लगने के बाद रिटायर हो गए तो बेदी ने पारी जल्दी घोषित कर दी.

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जबकि साल 1978 में बेदी ऐसे पहले कप्तान बने जिसने मैच पूरा हुए बिना ही हार मान ली थी. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एक वनडे मैच में भारत को 14 गेंदों में 23 रन बनाने थे और भारत के 8 विकेट बचे होने के बावजूद बेदी ने क्रीज़ से बल्लेबाज़ों को वापस बुला लिया था. बेदी पाकिस्तान के बॉलर सरफ़राज नवाज की 4 बाउंसरों का विरोध कर रहे थे. क्योंकि बेदी इन बाउंसरों में से एक भी गेंद वाइड नहीं दिए जाने से नाराज़ थे.

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क्रिकेट के प्रशंसक बिशन सिंह बेदी को हमेशा एक अग्रेसिव स्पिनर और एक बेबाक क्रिकेटर के रूप में याद रखेंगे.