किसी शायर ने क्या खूब कहा है कि 'ये इश्क़ नहीं आसां बस इतना समझ लीजिये, एक आग का दरिया है और डूब के जाना है.' उस शायर की ये ग़ज़ल उस समय हक़ीक़त में बदलती हुई दिखाई देती है, जब हम पुणे की रहने वाली 29 वर्षीय रिशु को देखते हैं. जन्म के समय लड़के के रूप में पैदा हुए, राजू को बचपन में ही ये बात समझ आ गई थी कि उन्हें लड़कियों की तरह पहनना और बात करना अच्छा लगता है. शायद बचपन में ही वो अपने अंदर के होमोसेक्सुअल को पहचान गए थे.

14 साल पहले ही रिशु अपने पड़ोस के ही रहने वाले सुरेश के प्यार में पड़ गए थे और उसके साथ सुनहरे भविष्य के सपने सजाने लगे थे. सुनहरे भविष्य को ऐसे ही सपनों को देखते हुए उनके मन में अपने बॉयफ्रेंड से शादी का ख़्याल आया, जो उस समय दूसरी लड़कियों की तरफ आकर्षित होने लगा था. अपने बॉयफ्रेंड को वापिस पाने के लिए राजू ने अपना सेक्स ट्रांसप्लांट कराने का फैसला लिया.

एक मध्यम वर्गीय परिवार से सम्बन्ध रखने वाले राजू ने बड़ी मुश्किल से 3 लाख रुपये का बंदोबस्त किया और सेक्स चेंज करा कर रिशु बन गए, पर उनके रिश्तों में कड़वाहट पहले ही आ चुकी थी, जिसके बाद सुरेश ने उन्हें छोड़ दिया. एक साल पहले के करीब सुरेश दोबारा रिशु के पास लौटा और वो फिर शादी के बारे में सोचने लगे. पर कुछ दिनों पहले सुरेश ने फिर रिशु से नाता तोड़ लिया.

इसके बाद रिशु ने पुलिस और वकील का सहारा लिया, पर मदद करने के बजाय वो उसकी हंसी उड़ाने लगे.

इस बाबत सुरेश का कहना है कि वो अब भी रिशु से प्यार करता है और उसके साथ शादी करना चाहता है, पर उसके परिवार वाले किसी ट्रांसजेंडर को अपने घर की बहू नहीं बनाना चाहते.

Source: midday