हीरो सिर्फ़ फ़िल्मों में नहीं, असल ज़िंदगी में भी होते हैं. ऐसे ही हीरो हैं चेन्नई में रेलवे कॉन्स्टेबल शिवाजी.

सोमवार को आरपीएफ़ कॉन्स्टेबल रोज़ाना की तरह पेट्रोलिंग पर थे. शिवाजी भी अपने साथी हवलदारों के साथ लेडीज़ कंपार्टमेंट के साथ वाली बोगी में मौजूद थे. आखरी लोकल ट्रेन होने के कारण लेडीज़ कंपार्टमेंट खाली था और उसमें एक 25 वर्षीय महिला अकेले ट्रैवल कर रही थी.

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इसी बीच शिवाजी ने किसी के चीखने और चिल्लाने की आवाज़ सुनी. चूकीं इस लोकल ट्रेन में दूसरे कंपार्टमेंट में आने-जाने का रास्ता नहीं था, तो आने वाले हॉल्ट (स्टेशन) पर जब गाड़ी स्लो हुई, तो वो कूद गए. कूदने के बाद तुरंत शिवाजी उस लेडीज़ कंपार्टमेंट की ओर लपके और उसके अंदर आ गए.

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यहां उन्होंने देखा कि एक महिला बेहोश पड़ी है और एक शराबी उसका रेप करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने तुरंत आरोपी को अपने काबू में लिया और महिला को अस्पताल पहुंचाया. आरपीएफ़ ने आरोपी सत्यराज पर अटेंप्ट टू रेप का केस दर्ज कर जेल भेज दिया है.

वहीं दूसरी तरफ़ महिला ख़तरे से बाहर है और अस्पताल में हैं. यहां उनकी खैरियत पूछने ख़ुद आरपीएफ के IGP, Pon Manickavel पहुंचे. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, आईजीपी ने शिवाजी को ईनाम के तौर पर 5 हज़ार रुपये दिए.

हमें शिवाजी जैसे और भी कॉन्स्टेबल्स की ज़रूरत है, जो अपने काम को पूरी मुस्तैदी के साथ करते हैं. उम्मीद है कि इससे आरपीएफ़ के अन्य कर्मचारी भी प्रेरणा लेंगे. साथ ही रेलवे को महिलाओं की सुरक्षा के लिए और इंतज़ाम करने चाहिए.

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