अगर आपको अब भी एटीएम से कैश निकालने में परेशानी आ रही है, तो इसके लिए आप सरकार को गाली देने के बजाए जमाखोरों के सिर ठीकरा फोड़ सकते हैं. क्योंकि ATM में नोट तो अब पहुंच रहे हैं, लेकिन कैश ख़त्म होने के डर के चलते लोग नकदी को घर में ही जमा करने लगे हैं.

एटीएम में नोटों की संख्या में 80 से 85 फ़ीसदी बढ़ोतरी होने के बावजूद, कई लोगों को खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है. जनता में नकदी खत्म होने का डर अब भी बना हुआ है, शायद इसलिए ही ख़ास ज़रूरत न होने के बावजूद भी लोग, घर में बहुत ज़्यादा पैसे जमा कर रहे हैं.

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एनसीआर कॉरपोरेशन के सर्विस जनरल मैनेजर, आनंद के मुताबिक, "एटीएम में पांच सौ के नोट पहुंचते ही लोगों की लाइनें लगनी शुरु हो जाती है. इनमें से ज़्यादातर लोग कैश को घर में संभाल कर रख लेते हैं. इस जमाखोरी की वजह से सामान्य स्थितियां भी ख़राब नजर आ रही हैं. मुझे लगता है कि लोगों का ये डर कुछ हफ़्तों में सामान्य हो जाएगा और उम्मीद है तब एटीएम में कैश की कमी महसूस नहीं होगी."

आनंद के मुताबिक, जहां एक एटीएम पर पहले 120 ग्राहक आया करते थे, वहीं ये तादाद बढ़कर अब 130 से 140 लोगों की हो गई थी. यानि पहले से लगभग 10 प्रतिशत ज़्यादा.

नोटबंदी के तुरंत बाद एटीएम से पैसा निकालने वाले लोगों की संंख्या में बढ़ोतरी हुई थी. आरबीआई को नए नोटों को छापने में समय लगा और कई लोगों की जिंदगियां खतरे में पड़ गई. रही-सही कसर एटीएम मशीनों ने पूरी कर दी थी, जिन्हें 2000 के नोट के साइज़ के हिसाब से ठीक करना पड़ा था. नोटबंदी के दौरान 100 से ज़्यादा लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.

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विशेषज्ञों के अनुसार, सेविंग्स अकाउंट में एक हफ़्ते में पैसे निकालने की सीमा को अब भी 24000 हज़ार ही रखा गया है, मगर एटीएम से रोज़ाना निकलने वाले पैसों पर बढ़ी सीमा के बाद ही एटीएम तेजी से ख़ाली होते नजर आ रहे हैं.

वहीं आरबीआई पिछले हफ़्ते ये घोषणा कर चुकी है कि 20 फरवरी से सेविंग्स अकाउंट की सीमा को बढ़ाकर 50,000 कर दिया जाएगा और 13 मार्च को इस सीमा को पूरी तरह से ख़त्म कर दिया जाएगा यानि मार्च के शुरुआत तक एटीएम एक बार फिर पैसों से गुलज़ार होंगे.

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मार्च में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आने हैं. मार्च में ही एटीएम की स्थिति काफ़ी हद तक सामान्य हो जाएगी. मार्च में ही बीजेपी को नोटबंदी के फ़ैसले का फ़रमान जनता सुना देगी.

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