कोटा. राजस्थान में मौजूद वो जगह, जिसे एजुकेशन हब के रूप में जाना जाता है. डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना लिए हर साल यहां लगभग 2 लाख बच्चे पहुंचते हैं. इंजीनियरिंग और मेडिकल के तमाम बड़े कोचिंग संस्थानों के साथ ही यहां 150 से ज़्यादा छोटे बड़े कोचिंग सेंटर्स मौज़ूद हैं.

लेकिन देश का ये कोचिंग हब पिछले कुछ सालों में आत्महत्याओं का गढ़ बनता जा रहा है. कोटा एक तरफ़ जहां मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में अच्छे परिणामों लिए जाना जाता है, वहीं पिछले कुछ समय से ये जगह छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों को लेकर सुर्ख़ियों में है.

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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, साल 2015 में यहां 19 छात्रों ने सुसाइड किया था. वर्ष 2014 में ये संख्या बढ़कर 45 हो गई. कोचिंग के इस राष्ट्रीय हब में पिछले पांच सालों में छह दर्जन से ज़्यादा बच्चे अपनी ज़िंदगी तमाम कर चुके हैं.

सुसाइड्स में बढ़ोतरी को देखते हुए कोटा हॉस्टल एसोसिएशन ने कुछ ज़रूरी कदम उठाने का फ़ैसला लिया है. इस फ़ैसले के मुताबिक, अब हॉस्टल के कमरों में एक स्प्रिंग उपकरण और एक सायरन को कमरे में लगे पंखों के साथ जोड़ा जाएगा. गौरतलब है कि निराशा और डिप्रेशन के चलते ज़्यादातर छात्र आसान तरीका अपनाते हुए हॉस्टल रूम के पंखे से लटककर ही आत्महत्या करते हैं.

कोटा हॉस्टल एसोसिएशन के प्रेज़ीडेंट नवीन मित्तल के मुताबिक, इस एसोसिएशन के साथ संबंधित हर हॉस्टल रूम के पंखे में एक सीक्रेट स्प्रिंग उपकरण और सायरन सेंसर लगाया जाएगा. ये सीक्रेट स्प्रिंग उपकरण 20 किलो से ज़्यादा वज़न उठाने में सक्षम नहीं होगा, 20 किलो से ज़्यादा वज़नी चीज़ का इस्तेमाल होने पर ये अपने आप नीचे गिर जाएगा. इसके अलावा पंखे में मौजूद सीक्रेट सेंसर भी एक्टिव हो जाएंगे, जिससे प्रशासन को फ़ौरन ख़बर लग जाएगी.

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एसोसिएशन ने स्प्रिंग उपकरण और सेंसर के लिेए गुजरात की एक कंपनी को ऑर्डर दिया था. कुछ हॉस्टलों में इन्हें लगाने का काम भी शुरू कर दिया गया है. एसोसिएशन को उम्मीद है कि सभी हॉस्टलों में इन उपकरणों को दो से तीन महीने में फ़िट कर लिया जाएगा.

हॉस्टल को अत्याधुनिक बनाने के लिए एसोसिएशन ने कई और इंतज़ाम भी किए हैं. मसलन, कोचिंग संस्थानों में बायोमिट्रिक अटेंडेंस मशीनों को लगाया गया है. इन्हें हॉस्टलों में रोज़ हाज़िरी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. इससे बच्चों की अटेंडेस के मेसेज अभिभावकों, हॉस्टल वार्डन और अधिकारियों तक भी पहुंच सकेंगे.इन मशीनों को शहर के 80 से 90 होस्टलों में लगाया गया है, जो कोटा के लैंडमार्क क्षेत्र में भी आते हैं.

गौरतलब है कि कोटा में 500 से 550 हॉस्टल इस एसोसिएशन के साथ जुड़ें हैं. इसके अलावा, क्षेत्र में एंट्रेस और एक्ज़िट रोड से लेकर उन नाकों और चौराहों पर भी सीसीटीवी कैमरों को लगाया जाएगा, जहां ये कोचिंग इंस्टीट्यूट्स और हॉस्टल मौजूद हैं.

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कोटा में बढ़ती आत्महत्याओं के चलते राज्य सरकार के साथ-साथ ज़िला प्रशासन कई उपाय कर चुका है, लेकिन बच्चों में एंट्रेस एक्ज़ाम को लेकर बैचेनी और तनाव में ख़ास कमी नहीं आई है. शायद यही कारण है कि एक्ज़ाम के दौरान यहां सुसाइड की सबसे ज़्यादा खबरें आती हैं.

मौत के तरीकों पर लगाम लगाने के बजाए स्टूडेंट्स के मानसिक तनाव से संबंधित कुछ किया जाता, तो शायद बेहतर होता.

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