दुनिया में कई तरह के लोग होते हैं. जितने तरह के लोग, उतनी तरह की मानसिकताएं. कुछ सामान्य, कुछ नकारात्मक तो कुछ सकारात्मक. लेकिन आरती महादेवन चौथी कैटेगरी में आती है. वे दुनिया को लेकर इतनी सकारात्मक हैं कि वे कभी अपना घर लॉक नहीं करती.

दो एनजीओ में काम करने वाली और अक्टूबर में दान उत्सव पर खूब दान करने वाली चेन्नई की आरती महादेवन ने ये प्रक्रिया एक दशक पहले शुरु की थी.

उन्होंने कहा कि 'मैंने कई सालों पहले इस प्रैक्टिस को शुरु किया था. एक दिन मुझे ख्याल आया कि मैं अपने बच्चों को घर पर मेड के पास छोड़ कर जाती हूं और अपने कीमती गहनों को लॉक रखती हूं. मेरे बच्चे मेरे लिए बेशकीमती है और वे संवेदनशील हालातों में हैं और ये गहने जिनकी कोई खास कीमत नहीं, इन्हें मैं अतिसुरक्षित रखना चाहती हूं. मुझे एहसास हुआ कि ये बेहद अजीब है. मैंने उसी दिन के बाद से अपने घर को लॉक करना छोड़ दिया. मेरे पास कम कीमती चीज़ें हैं, कुछ ज्वेलरी है,लेकिन असलियत में ये किसी भी तरह से उतना ज़रुरी नहीं है'.

महादेवन ने अपने बच्चों को भी घर न लॉक करना सिखा दिया है. उन्होंने कहा 'केवल परिवार के साथ प्राइवेसी के समय ही मैं अपना घर लॉक करती हूं. लेकिन जब भी हम घर से बाहर होते हैं, हमारा घर हमेशा खुला रहता है'.

कई ऐसे मौके आए हैं जब प्रीति के घर से चीज़ें उधार ली गई हैं, लेकिन कभी उनके सामान की चोरी नहीं हुई. उनके अपार्टमेंट के गार्डनर एक बार उन्हें बिना बताए महादेवन के घर से साइकिल पंप ले गए थे, लेकिन गार्डनर ने अगले दिन आकर ये पंप लौटा दिया था.

एक बार उनके पति ने रसोइये को निकाल दिया था, तो उसने उनके घर से चावल चुराए थे. प्रीति का कहना है कि 'मुझे लगता है कि लोग तभी किसी चीज़ को उठाते हैं, जब उन्हें बेहद ज़रूरत होती है. इसलिए मैं इसे लेकर परेशान नहीं होती. वे अपने घर की चाबी भी अपने साथ नहीं रखती है'.

महादेवन परिवार के घर में काम करने वाली गीता ने कहा कि 'जब-जब मैडम बाहर होती हैं तो मैं उनके घर को लॉक कर देती हूं लेकिन वे मुझे हर बार ऐसा करने से मना ही करती हैं.'

महादेवन का मानना है कि 'लोग अपने कीमती सामानों को लॉकर में रख कर जाते हैं क्योंकि वे अपने नौकर या मेड पर विश्वास नहीं कर पाते लेकिन वे ऐसा नहीं करती क्योंकि वे क्लास और वर्ग की वजह से लोगों में भेदभाव नहीं करती हैं. उन्होंने कहा कि जब आप लोगों पर भरोसा करना शुरु करते हैं तो आप लोगों का भरोसा जीतते भी हैं.'

प्रीति महादेवन की कहानी अविश्वसनीय है लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि ज़िंदगी को लेकर उनका नज़रिया देश के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा भी है.