कोल्ड ड्रिंक्स के नाम पर सालों से पेप्सी, कोको-कोला जैसे उत्पाद सिर्फ़ भारतीय बाज़ारों पर ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के बाज़ारों पर अपना कब्ज़ा बनाये हुए हैं. इसकी वजह से बहुत से लोकल उत्पाद बाजार में कहीं खड़े ही नहीं दिखाई देते. इस परेशानी का हल निकालते हुए तमिलनाडु की दुकानों ने पेप्सी और कोक का बहिष्कार किया है.

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रिपोर्ट की मानें, तो इसके संकेत प्रदेश में हुए जल्लीकट्टू प्रदर्शन के साथ ही दिखने लगे थे. प्रदेश के दो बड़े व्यापारी संगठनों ने स्वदेशी पेय को बढ़ावा देने के लिए ये फ़ैसला लिया. उनके मुताबिक ये कंपिनयां भू-जल का बड़े पैमाने पर दुरूपयोग करती हैं.

फर्स्टपोस्ट की ख़बर के मुताबिक तमिलनाडु ट्रेडर्स फेडरेशन (TNTF) और Consortium of Tamil Nadu Traders (CTNTA) ने मिलकर राज्य भर के दुकानदारों से अपील की है कि वो इन प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करें. इसके बदले वो Kali Mark, Bovonto और Torino जैसे देशी उत्पादों की बिक्री पर ध्यान दें.

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TNVSP के प्रेजिडेंट ऐ.एम. विक्रम राजा का कहना है कि 'जल्लीकट्टू प्रदर्शन के दौरान हमने देखा कि यूथ अब पेप्सी और कोक जैसे उत्पादों से दुरी बनाने लगा है. इसके बाद हम सबने मिल कर एक कैम्पेन चलाया, जिसमें हमने लोगों से अपील की वो विदेशी ब्रांड्स का बहिष्कार करें. इसके साथ ही हम लोगों ने फ़ैसला लिया है कि 1 मार्च से हम किसी भी विदेशी ब्रांड्स को नहीं बेचेंगे.'

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, संगठन का ये फ़ैसला आने के बाद दुकानदार दो भागों में बंट गए हैं. एक गर्मियों के लिए इन प्रोडक्ट्स की खरीदारी से बच रहा है, जबकि दूसरा समूह अपने पास बचे हुए ड्रिंक्स को सस्ते में बेचने के लिए मजबूर है.

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इंडियन बेवेरजेस एसोसिएशन, ट्रेड संगठन के इस फ़ैसले से नाखुश नज़र आ रहा है. एसोसिएशन के सेक्रेटरी अरविन्द वर्मा के मुताबिक संगठनों का ये फ़ैसला काफ़ी निराशाजनक है.

उनका कहना है कि 'ये सिर्फ़ किसान, ट्रेडर्स और रिटेलर्स की ही बात नहीं है बल्कि उस उद्योग का भी मुद्दा है, जिस पर देश का इकॉनोमिक विकास का आधार टिका हुआ है.'

हालांकि इस बीच ये ख़बरें भी आने लगी है कि ट्रेड यूनियन के इस फ़ैसले का असर दिखाई देने लगा है. कोयम्बटूर के आस-पास बने होटल्स भी इस बहिष्कार में शामिल होने लगे हैं.

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