क्या आपने कभी सोचा है कि किसी कलर ब्लाइंड यानि रंगों को ठीक से देख न पाने वाले व्यक्ति की जिंदगी कितनी अतरंगी या बदरंग होती है? ऐसे लोगों को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है या फिर ये रंग-बिरंगी दुनिया उनके लिए किन मायनों में अलग होती है?

जैसा कि ज्यादातर लोगों को लगता है, कलर ब्लाइंडनेस का मतलब ये नहीं कि लोगों को दुनिया केवल ब्लैक एंड व्हाइट ही नजर आती है. दरअसल, इस बीमारी से ग्रस्त 99 प्रतिशत से ज्यादा लोग रंगों को देख सकते हैं. इसी वजह से Color Vision Deficiency को रंग अंधता का ज्यादा बेहतर पैमाना माना गया है. एक वेबसाइट के मुताबिक, हर 200 में से एक महिला और हर 12 में से एक शख्स किसी न किसी तरह की CVD का शिकार ज़रूर होता है. यूं तो CVD कई प्रकार के होते हैं, लेकिन इन्हें चार मुख्य तौर पर बांटा गया है

सामान्य तौर पर रंग लोगों को कुछ ऐसे दिखाई पड़ते हैं

Deuteranomalia

दरअसल, कलर ब्लाइंडनेस से ग्रस्त 99 प्रतिशत लोग रंगों को देख सकते हैं. लोगों में आमतौर पर Deuteranomalia सबसे आम होती है. 4.63 प्रतिशत आदमी और 0.36 प्रतिशत महिलाएं इस बीमारी से ग्रस्त होती हैं. कई लोग ताउम्र इसके बारे में पता भी नहीं चलता है. ऐसे लोगों को सभी रंग हल्के धुंधले नज़र आ सकते हैं.

Protanopia

इस बीमारी में लोगों को हरे और लाल रंग काफी धुंधले दिखाई पड़ते हैं, वहीं पीले और नीले रंग पर किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. हरे रंग का प्रभाव इस बीमारी में ज़्यादा होता है. दुनिया में केवल एक प्रतिशत लोगों को ये बीमारी होती है.

Tritanopia

जो लोग इस बीमारी से ग्रस्त होते हैं, उन्हें ज्यादातर चीजों में हरे और गुलाबी रंग का प्रभाव दिखता है. माना जाता है कि ये एक बेहद दुर्लभ बीमारी है और दुनिया में केवल 0.00001 प्रतिशत लोग ही इस बीमारी के शिकार होते हैं.

Monochromacy

ये सबसे दुर्लभ तरह की रंग अंधता है. जिन लोगों को ये बीमारी होती है, वो केवल ब्लैक और व्हाइट में ही चीजों को देख सकते हैं. दुनिया की आबादी का केवल 0.00003 प्रतिशत हिस्सा ही इस परेशानी का शिकार है.

नीचे दी गई कुछ तस्वीरें साबित करती हैं कि कलर ब्लाइंड और सामान्य नजरों में कितना ज्यादा फर्क होता है

प्रोटेनोपिया के शिकार लोगों को ट्रैफिक सिग्नल देखने में काफी परेशानी आ सकती है क्योंकि इनके लिए हरा रंग देखना टेढ़ी खीर होता है

ट्रिटैनोपिया से ग्रस्त लोगों की दुनिया अपने आप में एक अलग ही तरह का संसार होता है जैसा कि इस तस्वीर को देख कर भी समझा जा सकता है

जिन लोगों को Deuteranomaly बीमारी होती है, उन्हें लाल रंग काफी फीका दिखाई देता है

तस्वीर से साफ है कि ट्रिटैनोपिया से ग्रस्त लोगों के लिए खूबसूरती के मायने काफी अलग होते हैं

जहां प्रोटेनोपिया के शिकार लोगों को जिंदगी कुछ मायनों में बंजर हो जाती है वहीं ट्रिटैनोपिया से ग्रस्त लोगों को एक अलग तरह की दुनिया से रूबरू होना पड़ता है

ये सब्जियां जाहिर करती है कि जिन लोगों को प्रोटेनोपिया की बीमारी होती है, उनके लिए टमाटर शिमला मिर्च हो जाती है

पेड़ पौधों के साथ-साथ प्रकृति भी कलर ब्लाइंड लोगों के लिए कौतूहल का विषय होते हैं

तस्वीर से साफ है कि प्रोटेनोपिया से ग्रस्त लोगों को लाल वस्तु होने की परिस्थिति में सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है

डियूटेरोनोमैली होने पर आपको ताज़ा तरीन फूल भी सड़े हुए होने का एहसास करा सकते हैं

ट्रिटैनोपिया बीमारी से ग्रस्त लोग कई बार असली दुनिया से एकदम कटे होते हैं क्योंकि उनके लिए कई रंग ऐसे बदलते हैं जिनकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होती

प्रोटेनोपिया होने की स्थिति में पिज़्ज़ा देखकर ही आपका मन खराब हो सकता है

ट्रिटैनोपिया से ग्रस्त लोगों के लिए गुलाबी रंग बेहद अहम होता है क्योंकि कई रंगों में वे केवल गुलाबी रंग ही देख पाते हैं

ये तस्वीर साफ करती है कि ट्रिटेनोपिया के लोग एक अलग ही तरह की दुनिया में जिंदगी गुज़ारते हैं

बीमारी कोई भी हो लेकिन नेचर का मजा आप आसानी से उठा सकते हैं, हालांकि रंगों में जबरदस्त बदलाव आपको दिखाई जरूर देंगे

वहीं डियूटैरानोमैली में रंग हल्के, बेहद हल्के होते चले जाते हैं

सच में, कलर ब्लाइंड लोगों की दुनिया, अपने आप में कई तरह के रहस्यों को समेटे हुए है.

Source: Boredpanda