ओशो, ये नाम सुनते ही ज़ेहन में एक मॉर्डन गुरू की छवि उभर कर सामने आती है. एक ऐसा गुरू, जिसने अपने क्रांतिकारी विचारों से लोगों को आकर्षित किया. उनके विचार दूसरे बाबाओं और आध्यात्मिक गुरूओं से काफ़ी जुदा थे. यही वजह है कि आज भी उनके विचारों पर अमल करने वालों की कोई कमी नहीं.

ओशो का जीवन शुरुआत से ही रहस्यमयी रहा. उनकी मौत भी किसी रहस्य से कम नहीं थी. Netflix पर इन दिनों ओशो के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्र्री 'Wild Wild Country' ने एक बार फिर से इस पर बहस शुरू कर दी है. दुनिया को ये पता है कि ओशो की मौत 19 जनवरी 1990 को हुई, लेकिन उनकी मौत से जुड़े ये रहस्य कुछ और ही कह रहे हैं.

पुणे से बुलाया गया था डॉक्टर

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ओशो के आश्रम में बहुत से डॉक्टर कार्यरत थे, लेकिन उनकी मृत्यु से कुछ समय पहले पुणे से डॉक्टर गोकुल गोकणी को बुलाया गया था. उनके आते ही ओशो के पर्सनल फ़ीज़िशियन ने बताया कि ओशो अपना जीवन त्याग रहे हैं. आश्रम में इतने डॉक्टर होने के बाद बाहर से डॉक्टर क्यों बुलाया गया?

डॉ. गोकुल गोकणी ने कहा कि उन्हें धोखा दिया गया

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ओशो के डेथ सर्टीफ़िकेट पर हस्ताक्षर करने वाले डॉक्टर गोकुल गोकणी ने बाद में कहा कि उन्हें जबरन हार्ट अटैक वाले सर्टीफ़िकेट पर साइन करने को कहा गया था. वहीं अभय वैद्य की बुक 'Who Killed Osho' के मुताबिक, ओशो को ज़हर दिया गया था.

मौत के एक घंटे बाद ही कर दिया गया था अंतिम संस्कार

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ओशो के आश्रम में मौत पर रोने की बजाए ख़ुशी मनाने का रिवाज़ है. लेकिन उनके ख़ुद के गुरू की मृत्यु के तुरंत बाद ही उनका अंतिम संस्कार किया जाना अपने आप में कई सवाल खड़ा करता है. उनके अतिंम दर्शन करने के लिये भी बस 15 मिनट का समय रखा गया था.

ओशो की मृत्यु की सूचना उनकी मां को देरी से देना

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ओशो की मां उनके साथ आश्रम में ही रहती थीं, लेकिन उन्हें उनके बेटे की मौत की ख़बर बहुत देर बाद दी गई. इसके बारे में जानने के बाद उन्होंने कहा था- 'उन्होंने उसे मार दिया.'

ओशो की वसीयत को दशकों बाद रिलीज़ किया गया

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ओशो की मृत्यु 1990 में हो गई थी, लेकिन वर्ष 2013 में अदालत में पहली बार उनकी वसीयत पेश की गई थी. इसे ओशो इंटरनेशनल ने पेश किया था, जो फ़र्जी निकली थी.

ओशो की केयर टेकर और पूर्व प्रेमिका की मौत

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ओशो की प्रेमिका और केयर टेकर, मां प्रेम निर्वाणों की मौत भी रहस्यमयी थी. अभय वैद्य ने अपनी बुक में सवाल उठाते हुए बताया है कि उनकी मौत के बाद भी उनका अंतिम संस्कार चुपके से, जल्दी-जल्दी कर दिया गया. उनकी मृत्यु के कारणों का भी किसी को पता नहीं है.

ओशो की मौत के इतने सालों बाद भी इन सभी सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिल पाए हैं. शायद उनकी मौत भी उनके जीवन की तरह रहस्यमयी रहेगी.

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