महाभारत का कोई अध्याय हो या रामायण का कोई कांड, हिन्दू धर्म की ज़्यादातर किताबों में आपको किसी न किसी श्राप का जिक्र मिल ही जाता है. इन्हीं श्रापों में कुछ श्राप ऐसे भी थे, जो हिंदू पौराणिक कथाओं में बहुत ही ज़्यादा प्रचलित हुए. आज हम आपके लिए इंडियन माइथोलॉजी से कुछ ऐसे ही श्राप ले कर आये हैं, जो इतिहास की नज़र में काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

कुंती को श्राप

महाभारत में जिक्र मिलता है कि कर्ण, कुंती की संतान थे. इस बात को जानने के बाद पांडव बहुत आहत हुए, जिसके बाद युधिष्ठिर ने कुंती को श्राप दिया कि आज के बाद कोई भी महिला अपने प्रसव को नहीं छिपा पायेगी. शायद ये इसी श्राप का असर है कि गर्भवती होने के दौरान महिलाओं का पेट बाहर की तरफ़ दिखाई देने लगता है.

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भगवान कृष्ण को गांधारी का श्राप

महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद भगवान कृष्ण कौरवों की मां गांधारी से उनके बेटों की मौत का शोक प्रकट करने के लिए मिलने गए, जहां गांधारी उन्हें देख कर गुस्से से लाल हो गई. यहीं उन्होंने कृष्ण को श्राप दिया कि जैसे तुम्हारी वजह से मेरे सभी बेटे युद्ध में मारे गए, ऐसे ही तुम्हारे कुल का नाश होगा. कृष्ण की मृत्यु के बाद यमुना के तट पर कृष्ण के सभी बेटों में भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें यदुवंश समाप्त हो गया.

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ब्रह्मा को शिव का श्राप

जब शिव लिंग से ब्रह्मा और विष्णु, लिंग के छोरों को ढूंढ़ने के लिए विपरीत दिशा में गए. काफ़ी दूर तक जाने के बाद जब विष्णु को लिंग का दूसरा छोर नहीं दिखाई दिया, तो वो लौट आये. जबकि ब्रह्मा ने छोर न मिलने के बावजूद विष्णु को कहा कि उन्होंने दूसरा छोर ढूंढ लिया है. शिव उनकी इस बात से क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रह्मा को श्राप दिया कि जन्मदाता होने के बावजूद आप कभी पूजे नहीं जायेंगे.

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गाय, कौए, तुलसी, ब्राह्मण और फाल्गुनी नदी को माता सीता का श्राप

पिता की मौत के बाद भगवान राम अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के पिता दशरथ का पिंड दान करने के लिए गया गए, जहां राम और लक्ष्मण नहाने के लिए चले गए. उसी समय दशरथ की आत्मा प्रकट हुई और सीता से पिंड दान करने के लिए कहा.

सीता ने गाय, कौवे, तुलसी, ब्राह्मण और फाल्गुनी नदी को साक्षी मान कर मिट्टी से पिंड दान कर दिया. राम और लक्ष्मण लौटे, तो उन्होंने पिंड दान वाली बात बता दी, पर राम को विश्वास नहीं हुआ, तो सीता ने गाय, कोए, तुलसी, ब्राह्मण और फाल्गुनी नदी को बुलाया और उनसे बताने को कहा.

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पर सच बताने के बजाय गाय, कोए, तुलसी, ब्राह्मण और फाल्गुनी नदी ने मिल कर झूठ कह दिया, जिसके बाद सीता ने इन सभी को श्राप दिया.

गाय- पूजनीय होने के बावजूद तुम्हें लोगों का जूठा खाना पड़ेगा.

कौआ- तुम कभी अकेले नहीं खा पाओगे और तुम्हारी मौत आकस्मिक होगी.

फाल्गुनी नदी- तुम्हारे ऊपर कितना भी पानी डाला जाए, तुम हमेशा सूखी रहोगी.

तुलसी- तुम पवित्र होने के बावजूद कभी गया में कदम नहीं रख पाओगी.

ब्राह्मण- कितना भी मिलने के बावजूद, दरिद्रता तुम्हारा साथ नहीं छोड़ेगी.

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