'लड़की हो घर का काम सीख लो, शादी के बाद ससुराल वालों को क्या मुंह दिखाओगी?, लड़की हो कर तुम्हें ऐसे नहीं हंसना चाहिए, उफ़्फ़ इस तरह भी कोई लड़की बैठती है क्या?' ऐसी ही न जाने कितनी सारी बातें हैं, जो लड़कियों पर ज़बरदस्ती थौंप दी गई हैं. यहां तक कि शादी के बाद भी लड़की और लड़के के बीच एक दायरा बना दिया जाता है, जिसके मुताबिक, लड़कियों के ज़िम्मे में घर के काम सौंप दिए जाते हैं, जबकि मेहनत और कई बार तो बिना मतलब के काम लड़कों के ज़िम्मे कर दिए जाते हैं. कुल मिला कर समाज द्वारा पूरी कोशिश की जाती है कि वो लड़की को घर की लक्ष्मी के रूप में स्थापित कर सके.

महशूर ब्लॉगर Darla Halyk ने जेंडर के हिसाब से काम को बांटते हुए ऐसे ही गंभीर मुद्दे को उठाते हुए एक पोस्ट लिखा, जिसमें कहीं न कहीं हर महिला कहानी आती नज़र है.

'जब मैं बड़ी हो रही थी, तो मैं महसूस कर रही थी कि मेरे घर में एक अजीब तरह की Hierarchy है, जो जेंडर पर आधारित थी. इस Hierarchy के तहत मेरी मां को घर की सफ़ाई, खाना पकाना और घर को घर बनाना जैसे काम करने थे. जबकि मेरे पिता और मेरा भाई हम लॉन की सफ़ाई करते, दिन भर खेलते रहते.

मुझे इस बात को समझने में काफ़ी टाइम लगा कि जब गर्मियों की रात में मैं, मेरा भाई पिता के साथ घर में घुसते थे, तो मेरी मां क्यों गुस्सा होती थी. हालांकि शादी के बाद जब मेरे बच्चे हुए, तो मुझे ये समझने में देर नहीं लगी कि मेरी मां उस समय क्यों गुस्सा हुआ करती थी.

मैं और मेरा भाई 70 और 80 के दशक में बड़े हुए थे. अपना काम ख़त्म करके हमें पेरेंट्स के आने से पहले खाना तैयार करना होता था. मैं घर की सफ़ाई और खाना बनाने की तैयारी करती थी. जबकि मेरा भाई लॉन की सफ़ाई करता था, कूड़ा बाहर फेंकने जाता था.

उन्हीं दिनों मैंने महसूस किया कि मैं और भाई दोनों अलग तरह की मेहनत करते थे. मैं अपने भाई से ज़्यादा मेहनत करती थी. इस वजह से कई बार मेरी मेरे भाई से लड़ाई भी हुई क्योंकि मैं उसकी तुलना में ज़्यादा काम करती थी. मुझे अच्छे से याद है कि कई बार ऐसा भी होता था कि किसी काम में मुझे मदद चाहिए होती थी. मुझे लगता था कि इस काम को मैं अकेले नहीं कर पाऊंगी, पर मम्मी के आने से पहले मुझे वो करना ही होता था, ऐसा क्यों था? क्योंकि एक लड़की होने की वजह से ये मेरी ज़िम्मेदारी थी.

शादी के बाद भी ये क्रम ऐसे ही चलता रहा, बल्कि उसके बाद धीरे-धीरे काम और मेहनत दोनों ही बढ़ती ही गई, पर मैंने कभी किसी चीज़ की कोई शिकायत नहीं की, क्योंकि मुझे ख़ुद समझ नहीं थी कि ये कैसे ग़लत है. शायद मुझे थोड़ा डर भी था कि यदि मैंने इसका विरोध किया, तो लोग मुझे पागल कहेंगे या मुझ पर पागलपन का लेबल लगा देंगे.

मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी बस यही देखने में बिता दी कि कैसे एक महिला अपने कन्धों पर घर की ज़िम्मेदारियों का बोझ लादे घूमती है, जबकि आदमी का काम उन्हें चुपचाप काम करते हुए देखना था. घर में पार्टी के समय मेरी मां का काम किचन संभालना और हमारा ख़्याल रखना होता था, जबकि मेरे पिता हॉल में बैठ कर फ़ुटबाल देखा करते थे और वहीं से फरमाइशें करते रहते थे.

मेरी मां की छवि मेरी नज़रों में एक देवी की थी, जो ख़ूबसूरती के साथ हमारी दुनिया बनाये हुए थीं. मैं जानती थी कि एक उम्र में आ कर मुझे भी मेरी मां की तरह ही बनना है. मेरी मां घर को घर बनाने के लिए कुछ भी कर सकती थीं, इस काम में मेरे पिता भी उनका साथ देते थे, पर उनकी भूमिका दूर से खड़ा हो कर देखने के जैसे थी.

ऑफ़िस से आ कर मेरी मां अभी कपड़ें भी नहीं बदलती थी और सीधा किचन में घुस जाती और रात का खाना तैयार करने में लग जाती. जबकि हम दोनों भाई-बहन पिता के साथ टेलीविज़न देखने में लगे रहते.

मैंने कई बार देखा कि वो किचन के अंदर काम में लगी रहती और खिड़की से हमें मस्ती करते हुए देखती. कई बार मुझे आश्चर्य होता कि कभी-कभी वो बहुत गुस्सा हो जाती और हम पर चिल्लाती. कई बार वो ऐसे मुस्कुराती कि उनकी आंखों के सामने उनकी मुस्कराहट भी छोटी हो जाती. हर समय उनका एक ही काम होता कि एक निश्चित समय पर हमारे लिए खाना तैयार करना. शायद एक औरत की नियति ही है कि दिन भर की थकान के बावजूद वो कभी रात का खाना बनाना नहीं भूलती. सच कहूं, तो मेरी मां मेरे लिए किसी सुपर हीरो से कम नहीं है.

शायद इसमें किसी की कोई ग़लती नहीं है, क्योंकि शुरू से ही हमने इस समाज को पितृसत्ता के हाथों में सौंप दिया था.

महिलाएं अपने काम से कुछ इस कदर प्यार करने लगती हैं कि अपनी सभी इच्छाओं और आकांक्षाओं को दबा देती हैं. इस काम में थकान होने के बावजूद वो ख़ुद को कभी थकने नहीं देती.

Darla का स्टेटस पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे उन्होंने आसान से शब्दों में पुरुषों की चेतनाओं पर प्रहार किया, पर आप भी अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र हैं. महिला सम्मान को बिना ठेस पहुंचाए यदि आपके पास कुछ लॉजिकल शब्द हों, तो एक साफ़-सुथरे डिबेट के लिए आप आमंत्रित हैं.