ड्रग्स के बारे में आप जानते ही होंगे कि ये हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना ख़तरनाक है. इसकी छोटी-छोटी डोज़ हमें इसका आदी बना सकती है. इससे बचने का एक ही रास्ता है कि इससे अपनी दूरी बनाये रखें. पर क्या आप जानते हैं कि तमाम दूरियों के बावजूद हम ड्रग्स का ऱोजाना इस्तेमाल करते हैं?

सुनने में थोड़ा अजीब लगता है न! पर ये सच है और ये ड्रग कहीं और नहीं, बल्कि हमारे किचन में मौजूद है. बात बेशक सोचने वाली है, पर हम कोई मज़ाक नहीं कर रहे.

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किचन में मौजूद और हम सबकी दैनिक ज़रूरतों को पूरा करने वाली चीनी भी किसी ड्रग से कम नहीं. The Guardian में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, सदियों से हमारे खाने का हिस्सा रही चीनी एक ऐसी चीज़ है, जो धीरे-धीरे हमारी आदत बन जाती है, पर इसके दूरगामी प्रभाव काफ़ी चिंताजनक हैं.

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इस रिपोर्ट के मुताबिक, किसी ड्रग को लेने से शरीर कुछ पल के लिए आनंद का अनुभव करता है, पर कुछ समय बाद लोग इसे अपनी आदत बना लेते हैं, जिससे शरीर को नुकसान पहुंचता है.

शायद यही वजह है कि 'Reward Centre' द्वारा चीनी को कोकेन, अल्कोहल जैसे ड्रग्स की श्रेणी में रखा गया है.

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आंकड़ों के मुताबिक, 1934 में जब अमेरिका The Great Depression का शिकार हो गया था, तब वहां मिठाइयों की बिक्री अचानक बढ़ गई थी. ऐसा ही 1920 में भी देखने को मिला था, जब सारा अमेरिका आर्थिक तंगी के दौर से गुज़र रहा था.

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इस बात को न्यूरोलॉजिस्ट और साइकोलोजिस्ट भी स्वीकार करते हैं कि एक समय आ कर चीनी की नॉर्मल-सी दिखने वाली आदत एब्यूज़ में बदल जाती है.

British Journal of Sports Medicine ने हाल ही में एक पेपर पब्लिश किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि लगातार चीनी का सेवन करने के बाद इससे दूरी बनाना मुश्किल होता है. इसकी वजह से तनाव और बर्ताव में बदलाव जैसी समस्या सामने आने लगती है.

Saint Luke Mid-America Heart Institute के वैज्ञानिकों ने चूहों पर एक रिसर्च की, जिसमें उन्होंने पाया कि ड्रग्स के एडिक्शन की तरह ही चूहों में इसके लक्षण दिखाई दिए. वैज्ञानिकों का कहना है बिलकुल इसी तरह इंसान भी इनका एडिक्ट बन जाता है.

हालांकि इस पर अब भी बहस ज़ोरों पर है कि चीनी को ड्रग की श्रेणी में रखा जाये या नहीं. ख़ैर जब तक ये बात साफ़ नहीं हो जाती, तब तक चीनी के मज़े लीजिये.

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