एक पिता ने अपनी बीमार बेटी के इलाज के लिए भारत सरकार पर मुकदमा कर दिया है. दरअसल मामला ऐसा है कि टीबी के एक जटिल रोग XDR TB से जूझ रही इस व्यक्ति की बेटी को इलाज के लिए एक खास ड्रग्स की ज़रुरत है, लेकिन भारत में वो ड्रग्स प्रतिबंधित है. अब इस मामले में सरकार को कोर्ट में जवाब देना होगा.

The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, पटना के श्याम त्रिवेदी (बदला हुआ नाम) सरकार को कोर्ट में ले गए हैं, ताकि उन्हें उन दो चमत्कारिक ड्रग्स के लिए अनुमति मिल सके, जिससे उनकी 18 साल की व्हील-चेयर पर पड़ी बेटी का इलाज हो सके. ये ड्रग्स हैं- Bedaquiline और Delaminid.

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ये ड्रग्स भारत में नहीं बनते और इसे केस के आधार पर मरीज को दिया जाता है, वो भी तब, जबकि बनाने वाली फर्म कम्पनी मरीज की हालत से इत्तेफ़ाक रखती हो. जबकि सरकार के पास 300 डोज़ इस ड्रग के अलग-अलग शहरों में यूज़ करने के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन ये त्रिवेदी की बेटी के काम फ़िलहाल नहीं आ रहे हैं.

इस ड्रग पर पाबन्दी होने की वजह ये है कि लोग इन ड्रग्स को ज्यादा या गलत तरीके से न ले सकें. एक रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल मेडिकल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि एंटीबायोटिक्स का ज्यादा इस्तेमाल से टीबी के मरीजों में ड्रग्स के लिए डेवलप होने वाली प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि हुई है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, त्रिवेदी की बेटी को 2011 में टीबी होने का पता चला था और प्राथमिक और सेकेंड्री इलाज महीनों चलने के बावजूद बीमारी ठीक नहीं हुई. लम्बी बीमारी के कारण उसका वजन सिर्फ़ 24 किलो रह गया है.

अपनी बेटी के लिए चमत्कारिक ड्रग को उपलब्ध करवाने के लिए त्रिवेदी अब सरकार को ये साबित करने में लगे हुए हैं कि उनकी बेटी को XDR TB है. डॉक्टर्स द्वारा लड़की की बुरी स्थिति बताये जाने के बावजूद भी सरकार ने टेस्ट रिज़ल्ट्स मांगे हैं. जिसे आने में 6 हफ्ते लगेंगे.

लड़की के पिता ने कहा कि 'कोर्ट ने कहा कि केवल दिल्ली के निवासी ही इस ड्रग को पा सकते हैं. हमारे पास दूसरा विकल्प है कि कम्पनी को अप्रोच किया जाए कि वो हमें ये ड्रग्स दे दे. लेकिन इस काम में भी 3 महीने लग जाएंगे. मेरी बेटी मर रही है. मुझे उम्मीद है कि कोर्ट इस बात का ध्यान रखेगी कि कोई और मरीज इस तरह के दुर्भाग्य से न गुज़रे.'

मामले की फाइनल सुनवाई शुक्रवार को होनी है. देखना होगा कि कौन जीत पाता है.