प्यार! ढाई अक्षरों का एक ऐसा शब्द जो हर इंसान को एक-दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करना सिखाता है. प्यार दो अधूरे लोगों को पूरा करने का काम करता है. ये प्यार ही तो है, जो हमें एक-दूसरे से बांधे रखता है और हर सुख-दुःख का साथी बनाता है. रिस्पेक्ट, कमिटमेंट, जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा यही वो शब्द हैं जो मिलकर प्यार के एहसास को पूरा करते हैं. हम अक्सर फ़िल्मों में देखते हैं कि कैसे फ़िल्म का हीरो पूरी दुनिया से लड़कर हीरोइन को हासिल कर लेता है. फ़िल्मी पर्दे पर प्यार को बड़े फ़ेसिनेटिंग तरीके से दिखाया जाता है. रियल लाइफ़ हो या फिर रील लाइफ़ एक बात सच है कि प्यार में एक अलग तरह की ताक़त होती है. असल ज़िंदगी में भी हमने कई ऐसी प्रेम कहानियां देखी और सुनी हैं, जो आज भी लोगों को न सिर्फ़ एक-दूसरे से प्यार करना सिखाती हैं, बल्कि उनको प्रेरित भी करती हैं.

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बॉलीवुड में भी कई ऐसे कपल हैं जिनकी लव स्टोरी के चर्चे अकसर होते रहते हैं. अमिताभ-जाया, अजय-काजोल, रितेश-जेनीलिया और अक्षय-ट्विंकल जैसे जोड़ों ने न सिर्फ़ फ़िल्मी पर्दे पर, बल्कि असल ज़िंदगी में भी सच्चे प्यार की मिसाल कायम की है. ऐसा ही एक बॉलीवुड कपल है, जिनके प्यार के चर्चे तो कम होते हैं, लेकिन असल ज़िन्दगी में इन दोनों ने सिखाया है कि सच्चे प्यार में बड़ी ताक़त होती है.

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दिलीप कुमार और सायरा बानो की लव स्टोरी से कम ही लोग वाक़िफ़ होंगे. लेकिन ये प्रेम कहानी दूसरी प्रेम कहानियों से एकदम अलग है. दरअसल, जिस समय दिलीप कुमार बॉलीवुड के सुपरस्टार हुआ करते थे. सायरा बानो तब से ही दिलीप कुमार से बेपनाह मोहब्बत करती आयी हैं. दिलीप के लिए उनकी ये मोहब्बत ही उन्हें बॉलीवुड तक खींच लाया था.

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बात उन दिनों की है जब दिलीप कुमार मधुबाला से रिश्ता टूटने के बाद तनहा हो गए थे. इस बीच उन्होंने कई ख़ूबसूरत अभिनेत्रियों के साथ काम किया. लेकिन कोई भी दिलीप कुमार के दिल को ना छू सकी. इसके बाद 1960 में एक फ़िल्म के सिलसिले में दिलीप की मुलाक़ात अपने से 20 साल छोटी सायरा बानो से हुई. लेकिन दिलीप ने सायरा के साथ काम करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई. उनको लगता था कि सायरा पर्दे पर उनके सामने बहुत छोटी नजर आएंगी. सायरा मन ही मन दिलीप कुमार को बेहद चाहती थीं और ये बात दिलीप भी अच्छे से जानते थे. धीरे-धीरे समय बीतता गया दोनों के बीच की नज़दीकियां प्यार में बदल गयी. साल 1966 में दिलीप और सायरा ने बिन बताए शादी कर ली. उस समय दिलीप कुमार 44 साल के जबकि सायरा मात्र 22 साल की थीं.

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सायरा ने अपने एक इंटरव्यू के दौरान कहा भी था कि जब वो 12 साल की थीं तबसे ही उनकी ख़्वाहिश थी कि शादी करेंगी, तो सिर्फ़ और सिर्फ़ दिलीप कुमार से करेंगी.

इस दौरान साल 1970 से 1984 तक दिलीप कुमार और सायरा बानो ने 'गोपी', 'छोटी बहू', 'बैराग', 'दुनिया' जैसी कुल 6 फ़िल्मों में साथ काम किया.

दिलीप-सायरा की शादीशुदा ज़िन्दगी बेहद ख़ुशहाल चल रही थी. साल 1972 में सायरा पहली बार प्रेग्नेंट हुई थीं. लेकिन 8 महीने की प्रेग्नेंसी के बाद सायरा को ब्लड प्रेशर की शिकायत हुई. इस दौरान बच्चे को बचाने के लिए सर्जरी करना असंभव था और दम घुटने से बच्चे की मौत हो गई. इस घटना के बाद वो कभी प्रेग्नेंट नहीं हो सकीं. इसके बावज़ूद दिलीप और शायरा का प्यार यूं ही परवान चढ़ता गया.

जबकि साल 1980 में एक ख़बर आई थी कि दिलीप कुमार ने बच्चे की चाहत में एक पाकिस्तानी महिला आसमां से दूसरी शादी की थी. लेकिन उनकी ये ख़्वाहिश कभी पूरी नहीं हो सकी. दो साल के इस रिश्ते ‌को दिलीप ने आसमां को तलाक देकर ख़त्म कर दिया था और वो एक बार फ़िर सायरा के पास लौट आए. लेकिन इस मामले पर दिलीप कुमार हमेशा कहते रहे कि उनका आसमां के साथ कोई रिश्ता नहीं था और न है.

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इस प्रकरण के बाद भी सायरा का दिलीप के लिए बेपनाह प्यार कम नहीं हुआ और एक पत्नी का फ़र्ज़ निभाते हुए उन्होंने हर मुसीबत में दिलीप कुमार का साथ निभाया. दिलीप-सायरा की ये सच्ची मोहब्बत आज भी युवाओं को सच्चे प्यार की सीख देती है. जबकि इस बात को दिलीप कुमार अपने हर इंटरव्यू में भी कहते रहे हैं कि सायरा उनकी परछाई हैं.

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आज भी दिलीप कुमार जहां कहीं भी होते हैं, सायरा उनके साथ साये की तरह नज़र आती हैं. उनके हर सुख दुःख में वो उनका साथ निभाती हुई दिख जाती हैं. दिलीप कुमार की सेहत पिछले कुछ सालों से ठीक नहीं चल रही है. लेकिन दुःख के इन पलों में भी दिलीप के लिए सायरा के बचपन की वो मोहब्बत आज भी उतनी ही है. सच्चा प्यार वही होता है, जो हर मुसीबत में एक-दूसरे के साथ क़दम से क़दम मिलाकर चले. सायरा बानो की ये मोहब्बत हमें सिखाती है कि किसी से प्यार तो करो तो दिलो जान से करो और सुख हो या दुःख हर हाल में मरते दम तक उसे निभाओ.